Friday, September 11, 2026
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल सौदे में राफेल हथियारों के बड़े हिस्से की मांग की

नई दिल्ली । भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीद रहा है। इस बीच नई दिल्ली ने पेरिस को स्पष्ट कर दिया है कि इस सौदे के तहत भारत में लड़ाकू विमानों के निर्माण के अलावा, राफेल हथियार पैकेज में भी स्वदेशी सामग्री शामिल की जाए। सूत्रों ने बताया कि इस सप्ताह अपने फ्रांसीसी समकक्ष के साथ हुई बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल सौदे में ‘मेक इन इंडिया’ हथियारों के बड़े हिस्से की मांग की।

इसमें मेटियोर, स्कैल्प और मीका मिसाइलों के साथ-साथ अन्य हथियारों का महत्वपूर्ण हथियार पैकेज भी शामिल होगा, जिस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

भारत सरकार ने पहले ही अतिरिक्त SCALP हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलों के लिए 3200 करोड़ के सौदे को मंजूरी दे दी है। इन मिसाइलों का उपयोग ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों के मुताबिक, अगले तीन दशकों में इन मिसाइलों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत चाहता है कि इन मिसाइलों क उत्पादन भारत में ही हो।

हालांकि भारत में बनने वाले राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों को जोड़ने की क्षमता होगी, लेकिन इनमें बड़ी संख्या में फ्रांस निर्मित मिसाइलें भी होंगी, जिन्हें फिलहाल पूरी तरह से आयात किया जा रहा है।

भारत अत्याधुनिक हथियार स्थानीय स्तर पर बनाना चाहता है। इसी कड़ी में, इस महीने की शुरुआत में Safran और BEL के बीच हैमर (Highly Agile Modular Munition Extended Range) स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड एयर-टू-ग्राउंड हथियार को भारत में बनाने के लिए एक संयुक्त समझौता हुआ है।

वहीं भारतीय वायु सेना और नौसेना के राफेल लड़ाकू विमानों के बेड़े में शामिल होने वाले अन्य मिसाइलों और हथियारों को भी इसी तरह का मॉडल के तहत शामिल किया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को अत्याधुनिक निर्माण तकनीक मिलेगी, जो फिलहाल ज्यादातर DRDO द्वारा विकसित गोला-बारूद और मिसाइलों का उत्पादन कर रही हैं।

भारत-फ्रांस के बीच होने वाली यह डील भारतीय कंपनियों को जटिल हथियारों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल करना संभव हो सकेगा। दुनियाभर में लंबी दूरी की मिसाइलों और हथियारों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है, जिसमें यूरोप भी शामिल है, जहां देशों ने रक्षा खर्च में वृद्धि की है।

भारत यूरोपीय संघ के एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में खुद को प्रस्तुत कर रहा है, ताकि रक्षा अनुसंधान और विकास में यूरोपीय विशेषज्ञता का लाभ उठाकर भारतीय रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत किया जा सके और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाई जा सके।

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