धार्मिक नगरी उज्जैन से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष होली का पर्व कुछ अलग रहने वाला है। 3 मार्च, यानी धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। आमतौर पर होली रंग, उत्साह और उमंग का प्रतीक होती है, लेकिन इस बार ग्रहण के कारण श्रद्धालु परंपराओं और सावधानियों का विशेष ध्यान रखेंगे।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य और शुभ कार्यक्रमों को टालने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण का समय और सूतक काल
चंद्र ग्रहण दोपहर 3:19 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। यह उदित चंद्र ग्रहण होगा, यानी चंद्रमा के उदय के साथ ही ग्रहण दिखाई देगा। लगभग 17 मिनट तक चंद्रमा पूर्ण रूप से ढका रहेगा, जिसे खग्रास स्थिति कहा जाता है।
ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं और शुभ कार्य नहीं किए जाते।
सूतक में क्या करें, क्या न करें?
सूतक काल में सामान्यतः भोजन करना वर्जित माना गया है। हालांकि बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सुबह 6:30 से 9:30 बजे के बीच हल्का भोजन कर सकते हैं।
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दिनभर संयम रखकर भजन-कीर्तन और ध्यान करना शुभ माना जाता है।
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यदि भोजन करना आवश्यक हो, तो उसमें तुलसी, कुशा या दूर्वा डालकर ग्रहण किया जा सकता है।
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मेवे, नारियल पानी, कच्चे फल और सब्जियां लेना बेहतर माना गया है।
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पका हुआ या अधिक प्रोटीनयुक्त भोजन से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि मान्यता है कि ग्रहण के दौरान ऐसा भोजन जल्दी दूषित हो सकता है।
उत्सव भी, सतर्कता भी
ग्रहण का अर्थ यह नहीं कि होली का आनंद समाप्त हो जाएगा। बस परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप थोड़ी सावधानी बरतनी होगी।
इस बार 3 मार्च 2026 की होली रंगों के साथ आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश भी देगी—जहां उत्सव और आस्था का संतुलन देखने को मिलेगा।

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