जबलपुर। देश भर में 540 नवोदय स्कूलों में छठवीं में छात्र के प्रवेश हेतु 2019 में अधिसूचना जारी हो चुकी है कि ईडब्ल्यूएस के स्टूडेंट को जगह दी जाए। इसके बाद भी आज तक केंद्र सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
लिहाजा जबलपुर की एक छात्रा के पिता ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया कि कमजोर वर्ग के छात्रों को नवोदय स्कूल में एडमिशन नहीं मिल रहा है। जबकि शासन ने सात साल पहले गाइडलाइन जारी कर दी थी। मामले पर आज हाईकोर्ट ने सुनवाई की और एक सप्ताह में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई अब एक सप्ताह बाद होगी।
एमपी के जबलपुर निवासी छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। ऐसे में ईडब्ल्यूएस वर्ग को बाहर रखना नीति के उद्देश्य के विपरीत है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रवेश के दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग, ग्रामीण छात्रों, बालिकाओं व दिव्यांग छात्रों के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कोई भी आरक्षण या विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।
जिससे इस वर्ग के छात्र पूरी तरह से बाहर हो जाते हैं।Óदेश में वर्तमान में लगभग 650 से अधिक नवोदय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 2.9 लाख छात्र अध्ययनरत हैं। याचिकाकर्ता की ओर से हाजिर हुए अधिवक्ता विकास मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि भारत सरकार एजुकेशन मंत्रालय ने एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया हैए जबकि ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए कोई अलग स्थान या आरक्षण नहीं है।
याचिका में यह भी बताया गया कि संविधान के 103वें संशोधन (2019) के माध्यम से अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया है। जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा संस्थानों में 10 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में ईडब्ल्यूएस को शामिल नहीं किया गया, जिसे याचिका में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी बताया गया है।
दो संस्थान, अलग-अलग कार्यशैली-
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया गया कि भारत सरकार द्रारा संचालित ज्ञमदकतपलं टपकलंसंलं ैंदहंजींद के अंतर्गत संचालित केंद्रीय विद्यालयों में ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों को प्रवेश में अवसर मिलता है। जबकि उसी मंत्रालय के अधीन संचालित नवोदय विद्यालयों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। यह स्थिति एक ही मंत्रालय के दो संस्थानों में अलग-अलग नियम लागू होने की ओर इशारा करती है। जिसे याचिका में भेदभावपूर्ण और असंगत बताया गया है।
याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को पूरी तरह से बाहर रखना नीति की मूल भावना के विपरीत है।
याचिका में हाल ही में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है। जिसमें न्यायालय ने ईडब्ल्यूएस छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा मानते हुए राहत प्रदान की थी। मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।











