Thursday, April 23, 2026
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Indian railway : सुरक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि,रेल फ्रैक्चर 92% और वेल्ड फेलियर 93% घटे

Indian railway : जबलपुर। दुनिया के सबसे विशाल और जटिल रेल नेटवर्कों में से एक, भारतीय रेलवे प्रतिदिन 14,000 से अधिक यात्री ट्रेनों सहित कुल 25,000 से ज्यादा ट्रेनें संचालित करता है, जिनमें रोजाना दो करोड़ से अधिक लोग सफर करते हैं। दशकों तक, रेलवे को लेकर होने वाली सार्वजनिक चर्चाओं का केंद्र केवल विस्तार और कनेक्टिविटी ही रहा। हालांकि, वर्ष 2014 के बाद से एक बुनियादी नीतिगत बदलाव के जरिए सुरक्षा को सभी परिचालनों के केंद्र में रखा गया। इसके परिणाम अब ठोस आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो संरचनात्मक, तकनीकी और वित्तीय स्तर पर हुए समान रूप से महत्त्वपूर्ण बदलावों को दर्शाते हैं।
Indian railway : एक राष्ट्रीय प्रकाशन में अपने लेख के माध्यम से केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर रेल सुरक्षा का आकलन प्रति बिलियन पैसेंजर-किलोमीटर होने वाली मृत्यु या दुर्घटनाओं के आधार पर किया जाता है, जिससे अलग-अलग स्तर के रेल सिस्टम के बीच तुलना संभव हो पाती है।
Indian railway
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Indian railway : वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान ही एक स्पष्ट संदेश दे दिया गया था: सुरक्षा सर्वोपरि। इसी विजन के साथ, 2014 से भारतीय रेलवे ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के कायाकल्प के लिए तकनीकी-आधारित, व्यापक और निरंतर वित्तीय निवेश वाली रणनीति अपनाई है।
Indian railway : परिचालन और आम लोगों के साथ होने वाले हादसों के सबसे बड़े जोखिम को हमेशा के लिए खत्म कर देती है। जनवरी 2019 तक पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क से सभी मानवरहित क्रॉसिंग हटा ली गईं। इस मिशन को सफल बनाने के लिए देशभर में 14,000 से अधिक रोड ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण किया गया, जिसने रेल सफर के साथ-साथ सड़क यातायात को भी सुरक्षित और बाधा रहित बना दिया है।
Indian railway : Rolling stock and track: Safety is the new infrastructure of railways

केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि सुरक्षा में सुधार केवल प्रणालियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब भारतीय रेलवे के फिजिकल हार्डवेयर का भी अभिन्न हिस्सा बन चुका है। साल 2014 से 2025 के बीच भारतीय रेल ने 42,600 से अधिक एलएचबी कोच का निर्माण किया, जबकि 2004-2014 के दौरान यह संख्या मात्र 2,300 थी।

Indian railway : एलएचबी कोच विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि टक्कर की स्थिति में वे एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में ‘मेक इन इंडिया’ प्रयासों को और मजबूती देते हुए 1,674 इंजनों का रिकॉर्ड उत्पादन किया गया और साथ ही 6,677 नए एलएचबी कोच तैयार किए गए, जो रेल सफर को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाते हैं।
Indian railway : ट्रैक की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि 60 किलोग्राम की भारी पटरियों, लंबे वेल्डेड रेल पैनलों, उन्नत वेल्डिंग तकनीकों और अत्याधुनिक अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन टेस्टिंग को व्यापक स्तर पर अपनाने से रेल फ्रैक्चर में 92 प्रतिशत और वेल्ड फेलियर में 93 प्रतिशत की भारी कमी आई है। पटरियों की मजबूती और निगरानी में आए इस सुधार ने सीधे तौर पर ट्रैक की खामियों के कारण होने वाली पटरी से उतरने की घटनाओं के जोखिम को न्यूनतम कर दिया है।
Indian railway : GPS-based fog devices and digital stations: A technological revolution at the grass

वैष्णव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के साथ-साथ जमीनी स्तर पर तकनीक को अपनाना सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। सर्दियों में कम विज़िबिलिटी के दौरान लोको पायलटों की मदद करने वाले जीपीएस आधारित ‘फॉग सेफ्टी डिवाइस’ की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है—जहाँ पहले ये केवल 90 यूनिट थे, वहीं अब कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 30,000 डिवाइस लगाए जा चुके हैं।

Indian railway : यह तकनीक लोको पायलट को आने वाले सिग्नल, रेलवे क्रॉसिंग और अन्य लैंडमार्क्स की रियल-टाइम सटीक जानकारी प्रदान करती है।  वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि अब लगभग 4,000 रेलवे स्टेशन पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं, जबकि 2014 से पहले के दशक में यह संख्या 900 से भी कम थी। इस डिजिटल बदलाव ने केंद्रीकृत और रियल-टाइम परिचालन निगरानी को उस स्तर पर संभव बना दिया है, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
Indian railway : Humanitarian foundation: Employee welfare, safety are the biggest investments

केंद्रीय मंत्री ने सुरक्षा के उस पहलू पर प्रकाश डाला जिसकी सार्वजनिक चर्चाओं में अक्सर अनदेखी कर दी जाती है।  वैष्णव ने जोर देकर कहा कि कोई भी तकनीक मानवीय सतर्कता का विकल्प नहीं हो सकती, इसीलिए भारतीय रेलवे ने अपने रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और सहायक) की कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित निवेश किया है। पूरे रेल नेटवर्क में अब वातानुकूलित विश्राम कक्ष, ड्यूटी के तय घंटे, नियमित काउंसलिंग और बेहतर आराम सुविधाओं का विस्तार किया गया है।

Indian railway : केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा: ‘आज सुरक्षा केवल प्रणालियों के भरोसे नहीं, बल्कि उन लोगों के भरोसे भी मजबूत हुई है जो इन प्रणालियों को चलाते हैं।’ मानवीय और तकनीकी पहलुओं का यह समन्वय दर्शाता है कि भारतीय रेलवे सुरक्षा को केवल मशीनी नजरिए से नहीं, बल्कि एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण से देख रही है।
Indian railway : A new benchmark for success: Railways’ unwavering commitment to safety

केंद्रीय मंत्री ने सुरक्षा के वास्तविक स्वरूप पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि रेलवे सुरक्षा का स्वभाव ऐसा है कि जब यह सुचारू रूप से काम करती है, तो शायद ही किसी का ध्यान इस ओर जाता है। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा, जो ट्रेनें दुर्घटनाग्रस्त नहीं होतीं, वे सुर्खियाँ नहीं बनतीं। लेकिन खबरों का यही अभाव इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि हमारे लिए हर एक नागरिक का जीवन अनमोल है।

Indian railway : वैष्णव ने तर्क दिया कि सुरक्षा संस्कृति में आए इस क्रांतिकारी बदलाव का सबसे बड़ा सबूत कोई एक नाटकीय घटना नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से दुर्घटनाओं और हताहतों की संख्या में आ रही निरंतर और डेटा-आधारित गिरावट है। इतने व्यापक रेल नेटवर्क पर, निरंतर और निर्बाध सुरक्षा सुनिश्चित करना उस बदली हुई कार्य-संस्कृति का प्रमाण है, जिसे पिछले वर्षों में ठोस निवेश और अटूट संकल्प के जरिए धरातल पर उतारा गया है।
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