Tuesday, July 7, 2026
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Bhopal News: गर्भवती महिला की ओवरी से निकला 10.2 किलो का ट्यूमर

Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा कर बड़ी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने एक गर्भवती महिला का सफल सिजेरियन ऑपरेशन किया।

खास बात यह रही कि महिला की ओवरी में करीब 10.2 किलोग्राम वजन का विशाल ट्यूमर भी मौजूद था। गर्भावस्था और इतने बड़े ट्यूमर का एक साथ होना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद मेडिकल टीम ने सूझबूझ, तैयारी और सटीक समन्वय के साथ ऑपरेशन पूरा किया। राहत की बात यह है कि सर्जरी के बाद मां और नवजात दोनों की हालत स्थिर और संतोषजनक बताई जा रही है।

एक साथ दो बड़ी चुनौतियां, मां और बच्चे दोनों पर था खतरा

यह मामला सामान्य डिलीवरी या सामान्य सर्जरी जैसा नहीं था। महिला गर्भवती थी और उसके पेट में पल रहे शिशु के साथ-साथ ओवरी में एक बहुत बड़ा ट्यूमर भी था। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों के सामने दोहरी जिम्मेदारी थी। एक ओर मां की जान सुरक्षित रखना जरूरी था, तो दूसरी ओर गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण थी।

ट्यूमर का आकार बड़ा होने के कारण ऑपरेशन के दौरान ब्लीडिंग, अंगों पर दबाव, सर्जिकल जटिलता और प्रसव से जुड़े जोखिम बढ़ सकते थे। यही वजह रही कि इस केस को बेहद संवेदनशील मानते हुए विशेषज्ञों की टीम ने पहले से विस्तृत योजना तैयार की।

पहले सुरक्षित प्रसव, फिर निकाला गया 10.2 किलो का ट्यूमर

ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने चरणबद्ध तरीके से काम किया। सबसे पहले महिला का सुरक्षित सिजेरियन प्रसव कराया गया। इस दौरान महिला ने 2.6 किलोग्राम वजन के स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। बच्चे के सुरक्षित जन्म के बाद डॉक्टरों ने उसी सर्जरी के दौरान महिला की ओवरी में मौजूद विशाल ट्यूमर को निकालने की प्रक्रिया शुरू की।

मेडिकल टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन करते हुए 10.2 किलोग्राम वजन का ट्यूमर सफलतापूर्वक बाहर निकाला। यह पूरी सर्जरी काफी जटिल मानी जा रही है, क्योंकि एक ही ऑपरेशन में प्रसव और ट्यूमर रिमूवल जैसी दो बड़ी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाली कमान

इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी सिंह और डॉ. अदिति खरे ने किया। दोनों डॉक्टरों ने पूरी प्रक्रिया की रणनीति बनाई और ऑपरेशन को सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया। वहीं एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका भी इस सर्जरी में बेहद अहम रही।

एनेस्थीसिया एक्सपर्ट डॉ. तृप्ति वत्सल्य, डॉ. जितेंद्र कुमार और डॉ. देवांशु सराफ ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी पूरी सर्जरी में सहयोग किया। डॉक्टरों के बेहतर तालमेल और समय पर लिए गए फैसलों ने इस कठिन ऑपरेशन को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

गर्भावस्था में इतना बड़ा ओवेरियन ट्यूमर होना बेहद दुर्लभ

डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान ओवरी में इतना बड़ा ट्यूमर मिलना बेहद दुर्लभ स्थिति होती है। आमतौर पर ऐसे मामलों में मरीज की निगरानी, जांच और उपचार बहुत सावधानी से करना पड़ता है। यदि ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा हो या गर्भ में पल रहे बच्चे पर दबाव डाल रहा हो, तो जोखिम और बढ़ जाता है।

ऐसे मामलों में ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, आसपास के अंगों पर असर, संक्रमण और अन्य जटिलताओं की आशंका रहती है। यही कारण है कि इस तरह की सर्जरी को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा जाता है। हमीदिया अस्पताल की टीम ने इस चुनौती को सफलतापूर्वक संभालकर अपनी विशेषज्ञता साबित की है।

मेडिकल प्लानिंग, अनुभव और टेक्नोलॉजी का मिला साथ

इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि पूरी मेडिकल प्लानिंग भी रही। डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति का विस्तृत आकलन किया। फिर प्रसूति, सर्जरी और एनेस्थीसिया टीम के बीच बेहतर समन्वय बनाकर ऑपरेशन की रणनीति तैयार की गई।

इसके साथ ही आधुनिक चिकित्सा तकनीक, मॉनिटरिंग और अनुभवी डॉक्टरों की मौजूदगी ने भी अहम भूमिका निभाई। यही वजह रही कि इतने जटिल केस में भी मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सका। अस्पताल प्रबंधन भी इस सफलता को एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है।

हमीदिया अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि

हमीदिया अस्पताल लंबे समय से मध्य प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पतालों में गिना जाता है। यहां गंभीर और जटिल मामलों का इलाज लगातार किया जाता है। हालांकि इस तरह का मामला अपने आप में खास माना जा रहा है। एक गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव कराना और उसी दौरान 10.2 किलो का ओवेरियन ट्यूमर निकालना आसान नहीं था।

इसलिए इस सफल ऑपरेशन को अस्पताल की बड़ी चिकित्सा सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह उपलब्धि न सिर्फ डॉक्टरों की दक्षता दिखाती है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं पर भरोसा भी मजबूत करती है।

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