PM Modi को मंगलवार को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ (Bintang Adipurna) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने आधिकारिक समारोह में पीएम मोदी को भेंट किया।
यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे होते रिश्तों की बड़ी पहचान भी माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह सम्मान ऐसे समय में मिला है, जब दोनों देश रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
PM Modi बोले- यह सम्मान 140 करोड़ भारतीयों का है
सम्मान स्वीकार करने के बाद PM Modi ने इसे पूरे भारत को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों का सम्मान है। पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की जनता, सरकार और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के प्रति आभार जताया।
उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच सदियों पुराने रिश्तों, साझा विश्वास और आपसी सम्मान को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और लोगों के बीच जुड़ाव से भी मजबूत होता है।
भारत-इंडोनेशिया संबंधों के ‘स्वर्ण युग’ पर चर्चा
PM Modi और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई वार्ता में भारत-इंडोनेशिया संबंधों के ‘स्वर्ण युग’ पर विशेष चर्चा हुई। संयुक्त प्रेस वार्ता में पीएम मोदी ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया के ‘इंडोनेशिया इमास 2045’ विजन और अपने ‘विकसित भारत’ लक्ष्य को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी सिर्फ वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भी बेहद अहम है। इसके अलावा पीएम मोदी ने लोकतंत्र, समावेशिता और ‘विविधता में एकता’ को भारत और इंडोनेशिया की साझा ताकत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच प्रस्तावित समझौता लोकतांत्रिक सहयोग को और मजबूती देगा।
वैश्विक मुद्दों पर भी दिखी समान सोच
इस मुलाकात में सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों पर ही नहीं, बल्कि कई अहम वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। फिलिस्तीन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख दोहराते हुए दो-राज्य समाधान और स्थायी शांति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, इसलिए संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान पहले से ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
वहीं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर भी भारत और इंडोनेशिया के विचार काफी हद तक समान दिखे। PM Modi ने साफ कहा कि भारत हमेशा आसियान की केंद्रीयता को महत्व देता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मजबूत साझेदारी जरूरी है।
जकार्ता में PM Modi का भव्य स्वागत
PM Modi की इंडोनेशिया यात्रा का स्वागत भी बेहद खास अंदाज में किया गया। जकार्ता पहुंचने पर उनका शानदार राजकीय स्वागत हुआ। इस दौरान घोड़े पर सवार गार्ड्स, गार्ड ऑफ ऑनर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को और भव्य बना दिया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने खुद गर्मजोशी से पीएम मोदी का स्वागत किया।
इससे पहले, जब प्रधानमंत्री मोदी का विमान इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, तब इंडोनेशियाई वायु सेना के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया। यह सम्मान और स्वागत दोनों देशों के मजबूत रिश्तों की तस्वीर भी पेश करता है।
चौथी इंडोनेशिया यात्रा, लेकिन कई मायनों में खास
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की चौथी यात्रा है। हालांकि, 2018 में भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित होने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है। इसलिए इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘महासागर विजन’ को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। इंडोनेशिया, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का एक अहम साझेदार है। ऐसे में यह दौरा क्षेत्रीय संतुलन, समुद्री सहयोग और आर्थिक भागीदारी के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रम्बानन मंदिर दौरे से मिलेगा सभ्यतागत जुड़ाव को नया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की यात्रा में इंडोनेशिया पहला पड़ाव है। इसके बाद वे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी जाएंगे। इंडोनेशिया दौरे के अगले चरण में पीएम मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर का दौरा करेंगे।
योग्याकार्ता स्थित यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के प्राचीन सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्तों का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संदेश भी देगा। कुल मिलाकर, पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है। वहीं, सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना भारत की वैश्विक साख और इंडोनेशिया के साथ उसके मजबूत होते संबंधों का बड़ा संकेत है।











