Ram Mandir : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने शनिवार को बताया कि सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा गठित जांच समिति मंदिर परिसर में संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की गहन पड़ताल की जा रही है। साथ ही, ट्रस्ट ने चढ़ावे की व्यवस्था में निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम भी उठाए हैं।
ट्रस्ट का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक निगरानी व्यवस्था लागू कर दी गई है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना समाप्त की जा सके.
महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन, पूजा-अर्चना और दैनिक धार्मिक अनुष्ठान पूरी तरह सामान्य रूप से जारी हैं. उन्होंने कहा कि वैष्णव परंपरा के अनुसार प्रतिदिन आरती, पूजन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम निर्धारित समय पर संपन्न हो रहे हैं तथा जांच का धार्मिक गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में संसद में भगवान रामलला की तस्वीर को कथित रूप से फर्श पर रखे जाने की घटना पर ट्रस्ट ने आपत्ति जताई है. महंत दास ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताते हुए सभी सांसदों से आस्था और धार्मिक प्रतीकों का सम्मान करने की अपील की.
राम मंदिर ट्रस्ट ने कुछ दिन पहले ही दान संग्रह और उसकी गणना की प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की थी. ट्रस्ट के अनुसार अब दान पेटियों को खोलने, उन्हें गणना कक्ष तक ले जाने, चढ़ावे की गिनती, सीलिंग और वापस स्थापित करने तक की पूरी प्रक्रिया की लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है. इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है ताकि प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे.
ट्रस्ट ने जानकारी दी कि 25 जुलाई से नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. दान पेटियों को पहले की तरह एक साथ खाली करने के बजाय अब अलग-अलग दिनों में खोला जा रहा है. इससे प्रत्येक पेटी की अलग से निगरानी और सत्यापन संभव हो पा रहा है तथा पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बन गई है.
नई व्यवस्था के तहत आठ सदस्यीय विशेष निगरानी दल का गठन किया गया है. इस टीम में बैंक अधिकारियों, ट्रस्ट प्रतिनिधियों, निजी सुरक्षा कर्मियों और अन्य अधिकृत कर्मचारियों को शामिल किया गया है. टीम का उद्देश्य दान संग्रह और गिनती की प्रत्येक प्रक्रिया की निगरानी करना तथा किसी भी संभावित अनियमितता को तुरंत रोकना है.
दान गणना कक्ष में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग के लिए दो पेशेवर वीडियोग्राफर और 360 डिग्री कैमरों की भी तैनाती की गई है. ट्रस्ट का कहना है कि इस तकनीकी निगरानी से पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में वीडियो रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में उपलब्ध रहेगा.
दान पेटियों को गणना कक्ष तक पहुंचाने के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारी उनकी सीलिंग और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करते हैं. बैंक अधिकारियों की मौजूदगी से वित्तीय प्रक्रिया की विश्वसनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है.
गौरतलब है कि कुछ सप्ताह पहले मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है और उनसे पूछताछ जारी है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही और चढ़ावे के प्रबंधन में कहां चूक हुई.
ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दान प्रबंधन प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा रहा है.
राम मंदिर देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां नकद दान के साथ-साथ सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भी अर्पित करते हैं. ऐसे में ट्रस्ट का मानना है कि दान प्रबंधन प्रणाली का पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके.
ट्रस्ट अधिकारियों के अनुसार जांच अपने अंतिम चरण में है और जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी. तब तक मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा, निगरानी और पारदर्शिता से जुड़े सभी नए प्रोटोकॉल को प्रभावी ढंग से लागू रखने का निर्णय लिया है.








