Saturday, July 20, 2024
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कब है निर्जला एकादशी? दूर कर लें कन्फ्यूजन: मंगलवार 18 जून को ही रखा जाएगा एकादशी का व्रत

जम्मू (हि.स.)। एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं लेकिन जब मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते है, श्रीकैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के प्रधान महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया इस व्रत मे पानी तक पीना वर्जित है, इसलिये इसे निर्जला एकादशी भी कहते है, निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेन एकादशी के नाम से जाना जाता हैं,इस व्रत के करने से व्यक्ति को दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है, पद्म पुराण के अनुसार ज्येष्ठ माह की शुक्ल एकादशी को यानि निर्जला एकादशी के दिन व्रत करने से सभी तीर्थों में स्नान के समान पुण्य मिलता है और इस दिन व्रत करने से सालभर की एकादशी का पुण्य मिलता है।

यह व्रत पुरुष और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 17 जून सोमवार सुबह 4 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और 18 जून मंगलवार 6 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 17 जून पूरा दिन 60 घड़ी है और दूसरे दिन यानी 18 जून मंगलवार को भी एकादशी तिथि विद्यमान हैं यहां द्वादशी तिथि का क्षय भी नहीं है। इस स्थिति में धर्मग्रंथों के अनुसार वैष्णव संप्रदाय और स्मार्त संप्रदाय- दोनों को उतरवर्ती द्वादशीयुता एकादशी के दिन ही निर्जला एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस वर्ष वैष्णव संप्रदाय और स्मार्त संप्रदाय 18 जून मंगलवार को निर्जला एकादशी व्रत करना चाहिए। निर्जला एकादशी व्रत 2024 पारण का समय- 19 जून बुधवार को सुबह 5 बजकर 24 मिनट से सुबह 7 बजकर 28 के बीच किया जाएगा।

इस दिन जो व्यक्ति दान करता है वह सभी पापों का नाश करते हुए परमपद प्राप्त करता है। इस दिन ब्राह्माणों एवं जरूरतमंद को छाता, खडाऊँ, आँवले, आम, खरबूजे, वस्त्र, जल का भरा घड़ा (कलश),पंखा, जौ, गाय आदि का दान देना शुभ माना जाता है, मिष्ठान आदि, दक्षिणा सहित यथाशक्ति दान करें। इस दिन लोग मीठे पानी की छबीलें लगाते हैं,निर्जला एकादशी के दिन दान-पुण्य और गंगा स्नान का विशेष महत्त्व होता है किसी कारण वश बाहर नदियों में स्नान नहीं कर सके तो घर में ही स्नान एव घर के आस पास जरूरतमंद को दान करें पूरा पुण्य प्राप्त होगा।

एकादशी के दिन “ॐ नमो वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए,हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का मात्र धार्मिक महत्त्व ही नहीं है, इसका मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के नज़रिए से भी बहुत महत्त्व है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। यह व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा देता है।

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