Friday, July 17, 2026
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भारत की पहली हाइड्रोजन Train शुरू, ₹5 से किराया, जानें रूट और खासियत

भारत ने स्वच्छ और आधुनिक परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड Train ने अपनी पहली यात्रा शुरू कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस Train को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह ट्रेन पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर आधारित है। खास बात यह है कि यह पारंपरिक डीजल इंजन की तरह प्रदूषण नहीं फैलाती। इसके अलावा, यात्रियों के लिए इसका किराया भी बेहद किफायती रखा गया है। ऐसे में यह ट्रेन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों को सस्ती यात्रा का विकल्प भी देगी।

सिर्फ ₹5 से शुरू होता है किराया

भारतीय रेलवे ने इस Train का शुरुआती किराया केवल ₹5 रखा है। वहीं, अधिकतम किराया ₹25 तक जाएगा। यानी कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को बेहद सस्ती सुविधा मिलेगी। दिलचस्प बात यह है कि कई रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत भी इससे अधिक होती है। इसलिए यह ट्रेन आम यात्रियों के लिए एक किफायती विकल्प बन सकती है।

इसके अलावा, कम किराए के बावजूद Train आधुनिक तकनीक और पर्यावरण अनुकूल सुविधाओं से लैस है। इससे साफ है कि रेलवे स्वच्छ परिवहन को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दे रहा है।

जींद से सोनीपत के बीच चलेगी नई ट्रेन

भारत की पहली हाइड्रोजन Train फिलहाल हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच संचालित की जा रही है। इस ट्रेन में कुल 10 कोच लगाए गए हैं। यह लगभग 90 किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटे में तय करेगी।

इसके अलावा, इस रूट पर ट्रेन के 11 स्टॉपेज होंगे। रेलवे के अनुसार, यह Train प्रतिदिन करीब 2,600 यात्रियों को सफर की सुविधा दे सकेगी। इससे इस रूट पर यात्रा करने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक परिवहन का लाभ मिलेगा।

कैसे काम करती है हाइड्रोजन Train ?

इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी है। पारंपरिक ट्रेनों की तरह इसे चलाने के लिए ओवरहेड बिजली के तारों या डीजल इंजन की जरूरत नहीं पड़ती।

दरअसल, हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होती है। यही बिजली Train के मोटर को चलाती है। इस वजह से ट्रेन शांत तरीके से चलती है और ईंधन की दक्षता भी बेहतर रहती है।इसके अलावा, यह तकनीक भविष्य के स्वच्छ परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

प्रदूषण नहीं, सिर्फ जल-वाष्प निकलती है

इस Train की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह जीरो-एमिशन तकनीक पर काम करती है। यानी इसके संचालन के दौरान धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें नहीं निकलतीं।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल की प्रक्रिया के बाद केवल जल-वाष्प (Water Vapour) निकलती है। इसलिए इसे पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित माना जाता है।

वहीं, Train के लिए आवश्यक ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई जींद में स्थापित विशेष प्लांट से की जाएगी। इसके साथ ही पूरे प्रोजेक्ट में आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों का भी उपयोग किया गया है, ताकि संचालन पूरी तरह सुरक्षित रहे।

भारत चुनिंदा देशों की सूची में हुआ शामिल

इस उपलब्धि के साथ भारत उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन Train तकनीक का उपयोग किया जा रहा है या उसका परीक्षण हो चुका है।

इन देशों में शामिल हैं: जर्मनी,यूनाइटेड किंगडम,फ्रांस,इटली,अमेरिका हालांकि, भारत ने इस तकनीक को अपने रेलवे नेटवर्क में अपनाकर स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इससे भविष्य में अन्य रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का रास्ता खुल सकता है।

क्लीन एनर्जी और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा

हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को क्लीन एनर्जी, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

इसके अलावा, इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। बेहतर परिवहन सुविधा से व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

क्या यह भारत के रेलवे का भविष्य है?

यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे अन्य गैर-विद्युतीकृत रूटों पर भी हाइड्रोजन Train का संचालन शुरू कर सकती है। इससे डीजल इंजन का उपयोग कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि देश के स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन भविष्य की शुरुआत मानी जा रही है।

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