Friday, October 23, 2026
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जन औषधि केंद्र के समान ‘फसल औषधि केंद्र’ खोलने पर विचार कर रही है सरकार: कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 96वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में 18 से ज्यादा केंद्रीय एवं राज्य मंत्री शामिल रहें।

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री ने फसल औषधि केंद्र के विचार को आगे बढ़ाने की भी बात की। साथ ही विभिन्न राज्यों के मंत्रियों से प्रसांगिक योजनाओं को जारी रखने और अप्रासंगिक योजनाओं को खत्म करने और नई योजनाओं के शुरू होने को लेकर सुझाव भी आमंत्रित किएं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों को मिल रहा है या नहीं, इसका निरीक्षण बेहद जरूरी है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि कृषि राज्य का विषय है, राज्य सरकारों के सहयोग के बिना कृषि की उन्नति के प्रयास अधूरे हैं। केंद्र और राज्यों को मिलकर कृषि क्षेत्र के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी हमारे मार्गदर्शक हैं, उनके विजन और नेतृत्व में पिछले वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। एक समय था जब हमें निम्न गुणवत्ता वाला गेहूं अमेरिका से आयात करके खाना पड़ता था। भारत के बारे में यह छवि थी कि हम कभी खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बन सकते। लेकिन आज यह छवि और मिथक पूरी तरह से धूमिल हो गया है। खाद्यान्न के मामले में भारत रिकॉर्ड कायम कर रहा है। अन्न के भंडार भर रहे हैं। खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर पर वृद्धि दर्ज की गई है। आज हम कृषि उत्पाद निर्यात कर रहे हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सोयाबीन, दलहन, तिलहन में अभी और अधिक शोध व काम की जरुरत है। गेहूं, चावल, मक्के के साथ-साथ दलहन, तिलहन व अन्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि को लेकर तेजी से प्रयास करने होंगे। जिसके लिए राज्यवार एवं फसलवार कार्ययोजना बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कल मैंने मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती का निरीक्षण किया। जहां खराब बीज की गंभीर समस्या देखने को मिली। खराब बीज के कारण अकुंरण ही नहीं हो पाया था। जिसके बारे में मैंने त्वरित जांच के आदेश दे दिए हैं। अमानक बीज, खाद और उर्वरक बेहद गंभीर विषय है, जिसे लेकर भी सरकार जल्द ही कड़ा कानूनी प्रावधान लाएगी। उर्वरकों के एमआरपी पर भी काम करने की जरूरत है। उर्वरक की सही कीमत तय होनी जरूरी है।

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