नवरात्रि की पावन बेला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में दो ऐतिहासिक फैसले हुए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि “राष्ट्रीय दलहन मिशन” को मंजूरी देने के साथ ही रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान-हित को सर्वोपरि मानते हुए संसाधनों व योजनाओं को समग्र रूप से जोड़ने की दिशा बनाई है।
शिवराज सिंह ने बताया कि देश में दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, पोषण एवं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से “राष्ट्रीय दलहन मिशन” मंजूर किया गया है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 242 लाख टन से 350 लाख टन करने का है। मिशन के तहत 416 जिलों में विशेष उत्पादन एवं वृद्धि कार्यक्रम लागू होंगे। इसमें चावल के परती क्षेत्र, सर्वश्रेष्ठ प्रजनक, आधार, प्रमाणित बीज, इंटरक्रॉपिंग, सिंचाई, मार्केट लिंकेज और तकनीकी सहायता को नीति में सम्मिलित किया गया है। दलहनी फसल में तूर, उड़द व मसूर की खरीद एमएसपी पर 100% होगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का पूर्ण लाभ मिले। मिशन का 2025-26 में 11,440 करोड़ रुपये का बजट है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के अनुसार गेहूं समेत रबी फसलों की एमएसपी में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए लागत पर 109% तक लाभ किसानों को मिलेगा। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि कैबिनेट के इन ऐतिहासिक फैसलों से किसानों की आमदनी, सामाजिक सम्मान एवं देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। सरकार, किसानों, किसानों के संगठनों और देश की जनता को विश्वास दिलाती है कि एमएसपी नीति, राष्ट्रीय दलहन मिशन और अन्य योजनाएं पूरी पारदर्शिता, वैज्ञानिकता और किसान-हित के साथ लागू होगी।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि कुसुम्भ के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल की गई है, तत्पश्चात मसूर के लिए 300 रुपये प्रति क्विंटल की गई है। रेपसीड और सरसों, चना, जौ और गेहूं के लिए क्रमशः 250 रुपये प्रति क्विंटल, 225 रुपये प्रति क्विंटल, 170 रुपये प्रति क्विंटल और 160 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
विपणन मौसम 2026-27 के लिए सभी रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य
(रु. प्रति क्विंटल)
| क्र.सं. | फसल | एमएसपी आरएमएस 2026-27 | उत्पादन लागत आरएमएस 2026-27 | लागत पर प्रति लाभ
(प्रतिशत में) |
एमएसपी आरएमएस 2025-26 | एमएसपी में वृद्धि
(वास्तविक) |
| 1 | गेहूं | 2585 | 1239 | 109 | 2425 | 160 |
| 2 | जौ | 2150 | 1361 | 58 | 1980 | 170 |
| 3 | चना | 5875 | 3699 | 59 | 5650 | 225 |
| 4 | लेंटिल (मसूर) | 7000 | 3705 | 89 | 6700 | 300 |
| 5 | रेपसीड और सरसों | 6200 | 3210 | 93 | 5950 | 250 |
| 6 | कुसुम्भ | 6540 | 4360 | 50 | 5940 | 600 |
विपणन मौसम 2026-27 के लिए रबी फसलों हेतु एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर निर्धारित करने की घोषणा के अनुरूप है। अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर अपेक्षित प्रति लाभ गेहूं के लिए 109 प्रतिशत है, तत्पश्चात रेपसीड और सरसों के लिए 93 प्रतिशत; मसूर के लिए 89 प्रतिशत; चना के लिए 59 प्रतिशत; जौ के लिए 58 प्रतिशत; और कुसुम्भ के लिए 50 प्रतिशत है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि रबी फसलों के इस संवर्धित एमएसपी से किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में किसानों की उपज की एमएसपी अभूतपूर्व रूप से कई गुना बढ़ाई गई है। 2014-15 से 2026-27 तक रबी फसलों की एमएसपी की तुलना करने पर स्पष्ट होता है कि गेहूं की एमएसपी 1400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2585 रुपये हो गई, लगभग दो गुना से अधिक। जौ की एमएसपी 1100 रुपये से बढ़कर 2150 रुपये हुई, जो दोगुना है। चना 3100 रुपये से 5875 रु., मसूर 2950 रुपये से 7000 रुपये (2.5 गुना), रापसी/सरसों 3050 रुपये से 6200 रुपये (दो गुना) और कुसुम्भ की एमएसपी 3000 रुपये से 6540 रुपये (2.2 गुना) पहुंच गई है।
इस तरह मोदी सरकार के 10 वर्षों में एमएसपी में हर फसल के लिए दोगुना या उससे अधिक की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे किसानों की आय, उत्पादन में रूचि व देश की खाद्य सुरक्षा को जबरदस्त मजबूती मिली है।











