Sunday, February 25, 2024
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मर्यादा पुरुषोत्तम की गाथा: डॉ निशा अग्रवाल

डॉ निशा अग्रवाल
जयपुर, राजस्थान

विजयदशमी का दिन आया
पुतला रावण का है जलाया
बुरे कर्म को मन से मिटाकर
अच्छाई का अलख जगाया
ये थी त्रेता युग की कहानी
पाप दोष निष्काम रवानी
मर्यादा पुरुषोत्तम की गाथा
गुरु वाल्मीकि ने लिख डाली
त्रेता युग के उस रावण के
दस थे चेहरे सब दिखते थे
एक-एक को मार गिराया
दशानन का अंत कराया
आज के रावण की नहीं गिनती
पल पल नियति बदलती इनकी
एक चेहरे के भीतर छुप कर
कई कलुषित और पापी चेहरे
किसको मारें किसको ठोकें
किसके लिए माथे को पीटें
जहां देखो बस एक ही चेहरा
पापी मन का काला चेहरा
बुराई पर डलता है पर्दा
अच्छी बातें कोई ना करता
कैसा विजयदशमी पर्व है
झूठ बोलना ही गर्व है
सच ईमान का भाव ना कोई
झूठ खरीदे आज हर कोई
पापी तो अय्याशी करता
निर्दोषी जीवन जेल में कटता
नहीं राम अब त्रेता युग के
गिरगिट बने बने हैं फिरते
कैसे होगा अंत पाप का
हर मानव मन के रावण का

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