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बाबुल की बिटिया: ममता शर्मा

परियों के देश से आईएक नन्हीं सी परीमाँ के आँचल की छाँवऔरपिता के प्यार-दुलार के बगिया में पली प्यारी सी एक कली

न जाने क्यों- प्रभजोत कौर

न जाने क्यों दिल कह रहा है सनम तू धोखा खा रहा है इश्क इबादत है खुदा की तू यार को खुदा बना रहा है छूट गई दुनिया...

प्यार- दीपक क्रांति

प्यार- किसी चित्रकार के लिए; सैकड़ों एक जैसे पेड़ों में से एक-एक के हिलते-डुलते सामूहिक पत्तों में से उन पेड़ों के खिलखिलाहट में से रूह को छूनेवाले ठूँठपन के दर्द के...

हे विधाता- एच के रूपा रानी

हे! विधाता हे विधाता ! किसी के जीवन को प्रकाश से भर दिया तो किसी के जीवन में दिया ही नहीं दिया दिया किसी के हाथ कलम तो किसी के...

सत्य- रजनी शाह

हर बार खुद को इन्सानों के बीच असुरक्षित ही पाया है थोड़े से ही विश्वास को हर बार टूटता पाया है यूं तो आदत सी बन गई है प्यार करने...

बासंती यादें- किरण मिश्रा

इन फागुनी हवाओं में लिपटी तेरी यादों की बासन्ती-खुशबू छूकर मेरे लबों को मेरी साँसों में उतर जाती है गूँजती है मेरे कर्णों में कोयल की मादक-पुकार बन, तो कभी रसीली आम्र-मंजरी...

विश्वास हूँ मैं कोई वहम नहीं- डॉ वर्षा चौबे

विश्वास हूँ मैं, वहम नहीं तुम तोड़ न पाओगे। जांच परख लो तौल कसौटी खरा ही पाओगे। धीरज में जो टूट गई हो मैं वो डोर नहीं हूँ। डरकर हारे...

खुशियों की डेली डोज- अंकिता कुलश्रेष्ठ

तुम मेरे जीवन के माइटोकॉन्ड्रिया हो, मेरी असीम ऊर्जा के जीवंत स्रोत, और ऑक्सीजन है तुम्हारा प्रेम मेरी साँसों के लिए, क्लोरोप्लास्ट की तरह है तुम्हारा आना मेरे नीरव जीवन में जिसने पतझड़ हटाकर हरा-भरा कर दिया है मन...

प्रेम के आख़र-सुरजीत तरुणा

प्रेम ने कहा, क्या मैं अपनी उँगलियों से तुम्हारा नाज़ुक चेहरा छू सकता हूँ? मैंने अपनी आँखें बंद कर ली उसने धीरे-धीरे मेरे चेहरे को छुआ मैं पिघलकर चाँदनी...

रिश्तों के मायने- अनुराधा चौहान

भीड़ कितनी भी हो मगर पर तन्हाईयां रास आतीं हैं होती है कुछ वेदना भरी स्मृतियां मन मस्तिष्क से नहीं निकल पातीं हैं ऐसे ही जब कोई अपना असमय ही...

यादों की परछाइयां- अनुराधा चौहान

कुछ लम्हे दिल में बस जाते तो मिटाएं नहीं मिटते यादों में उनके चित्र सदा ज़िंदा ही हैं रहते बचपन से लेकर जवानी कुछ यादें नई पुरानी कुछ धुंधले होते...

बेड़ियाँ रिश्तों की- शिवानी विनय सिंह

जब स्पर्श करती है कोई स्त्री किसी पुरुष का तो सच मानिए वह देह से बहुत परे होती है, वो छू रही होती है बहुत सारे...

पथिक अहो- सुधा सिंह

पथिक अहो... मत व्याकुल हो!!! डर से न डरो न आकुल हो। नव पथ का तुम संधान करो और ध्येय पर अपने ध्यान धरो। नहीं सहज है उसपर चल पाना। तुमने...

नाम कर दो देश के अपनी जवानी- श्वेता राय

सुभाष चंद्र बोस द्वारा दिये रंगून भाषण का काव्यानुवाद... मूक होकर सह रहे हम पीर क्यूँ| बह रहा केवल हमारा नीर क्यूँ|| माँ हमारी झेलती अपमान क्यूँ| हम...

उसकी आँखों में- अनु

उसकी आंखों में एक उदासी सी! नाव तैरती रहती थी अक्सर। उसकी आंखें नम हो कर भी!! दूसरों को धोखा दे जाती थी! वो मुस्कराना चाहती थी, अक्सर पर...

भंवर में फंस गया हूँ प्रभु- प्रभात कुमार

भंवर में फंस गया हूँ प्रभु, निकलने का तू अब ज्ञान दे। समर में अटकी जान है, तू ही अब कोई भान दे। अमर मैं क्या हो सकूँगा, कोई...

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