Thursday, October 22, 2026
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लालमन चौधरी ने अपना और बेटे-भतीजे का कराया धर्मान्तरण, मुम्बई से मिले एक साल में 9 लाख रुपए

सतना। एमपी के सतना स्थित धारकुंडी में पुलिस ने धर्मांतरण के एक संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस ने पिता-पुत्र सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी के बैंक खाते में बीते एक साल के भीतर मुंबई से करीब 9 लाख रूपए भेजे गए थे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सतना के झखौरा गांव के लालमन चौधरी उर्फ अब्दुल रहमान 68 वर्ष के खिलाफ ग्रामीण इलाके में धर्मांतरण कराने और अवैध धार्मिक गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरु कर दी। जांच में सामने आया कि लालमन चौधरी ने करीब 15 साल पहले खुद धर्म परिवर्तन किया था।

इसके बाद उसने अपने बेटे और रिश्ते के भतीजे का भी धर्मांतरण करा दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लालमन ने अपने बेटे विजय भारती उर्फ मोहम्मद उमर 32 वर्ष व रिश्ते के भतीजे दीनानाथ चौधरी उर्फ अब्दुल्ला 42 वर्ष का भी धर्म परिवर्तन कराया था। इसके बाद तीनों मिलकर क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां संचालित कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 और 5 के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

घर पर बनाया मस्जिदनुमा गुंबद-

करीब 15 दिन पहले आरोपी ने अपने घर की छत पर मस्जिदनुमा गुंबद का निर्माण करा लिया। इसकी जानकारी गांव वालों को लगी तो उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम ने आरोपी के घर की तलाशी ली। घर की तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपी द्वारा स्वयं लिखी गई एक पुस्तक, धार्मिक किताबें, झंडे, बैनर व आपत्तिजनक संदेश वाले मोबाइल फोन बरामद हुए। मोबाइल में कई आपत्तिजनक संदेश और धार्मिक प्रचार से जुड़ी सामग्री भी मिली है।

खाते में आए 9 लाख, मुंबई कनेक्शन सामने आया-

बैंक खातों की जांच में खुलासा हुआ कि पिछले एक साल में आरोपी के खाते में करीब 9 लाख रूपए दूसरे राज्य से जमा कराए गए। पूछताछ में लालमन ने बताया कि धार्मिक यात्राओं के दौरान उसकी पहचान मुंबई के एक व्यक्ति से हुई थी, जो कई बार झखौरा गांव भी आ चुका है। आरोपी के अनुसार वही व्यक्ति समय-समय पर ऑनलाइन ऐप के जरिए पैसे भेजता था और दोनों के बीच बातचीत केवल वॉट्सऐप कॉल के माध्यम से होती थी।

पुलिस जुटा रही कॉल और फंडिंग का डेटा-

फिलहाल पुलिस ने बैंक खातों का विस्तृत रिकॉर्ड जब्त कर लिया है। साइबर सेल की मदद से व्हाट्सएप कॉल के सोर्स और फंडिंग नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस रैकेट में अन्य लोगों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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