रास्ता: वंदना मिश्रा

वंदना मिश्रा

ससुराल से पिट कर भाग आई थी

रात में उसे दरवाज़े पर देख हुलसी माँ को
बरज दिया पिता ने
ऐसे कैसे अकेले भरी रात में!
रो-रो कर उसने दिखाए
घाव जलने और कटने के निशान
“मार ही देंगे माँ अगर अब गई तो”

रोती माँ को डपट दिया भाई ने
‘तिरिया चरित्तर ‘मत दिखाओ
भाभी किवाड़ की ओट से बोली
“ऎसे तो हम कब के भाग जाते,
जो सह रहें हैं इस घर में“
भाई ने प्यार से समर्थन किया

दोहराई गई माता सीता के ऊपर लगे
लांछन की कथा
“कौन मानेगा कि आई हो मायके”?

तुरंत फ़ोन किया पिता ने
बहन की ससुराल
गिड़गिड़ाते हुए माफ़ी माँगी
बहन के दुस्साहस के लिए।

कड़कते हुए ससुर ने कहा
“हमारी तरफ से मर गई वो।“

और लानतें दी गई बहन को
अब माँ भी खीझ गई उससे
बहन अपने बच्चे के लिए
रो पड़ी कई बार।

अंत में कुछ गुपचुप सलाह हुई
और रिश्ते के कुछ दबंग लोगों
के साथ पिता और भाई गए
उसे ससुराल छोड़ने
बहुत उपहारों और पैसों के साथ
जाती बहन को पकड़ कर रोती माँ
बहुत समझाती रही उसे
जिसका सारा निचोड़ ‘समझौता’ था।

जाती बहन के चेहरे पर अदभुत दृढ़ता दिखी
उसने कहा “अब कोई चिंता नहीं
मुझे मेरा रास्ता साफ़ दिख गया है।”

सब खुश हो गए

एक महीने बाद
ज़हर खाने से
बहन

की मौत की ख़बर मिली
उसे उसका रास्ता मिल गया था!

पिता और भाई को मुकदमा करने की सलाह
दे रहे हैं लोग।
दबी ज़बान से कहती है भाभी
आने वालों से “ज़बान की
बड़ी तेज़ थी।”