जबलपुर (लोकराग)। एमपी की बिजली कंपनियों में लगातार सेवानिवृत हो रहे नियमित लाइनमैनों की भरपाई करते हुए उनका विकल्प बनकर पूरी विद्युत व्यवस्था को संभालने वाले आउटसोर्स कर्मियों का शोषण बदस्तूर जारी है। मनुष्य की जगह मशीन समझे जा रहे इन आउटसोर्स कर्मियों से सभी नियमविरुद्ध कार्य कराए जा रहे हैं और अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। इस भीषण गर्मी में जहां लोग दोपहर में घर से निकलने में कतरा रहे हैं, वहां ये आउटसोर्स कर्मी एक कॉल पर उपस्थित हो जाते हैं।
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि जबलपुर सिटी सर्किल के पांचों शहर संभाग के कार्यपालन अभियंताओं से तकनीकी कर्मचारियों की लंबित समस्याओं पर चर्चा की गई। जिस पर सभी कार्यपालन अभियंताओं ने बताया कि करंट का कार्य करने वाले नियमित कर्मचारियों की अत्यधिक कमी होने की वजह से विद्युत के कार्य में अवरोध आ रहे हैं। क्योंकि नियमित कर्मी जो लगातार विद्युत मंडल में 30 वर्षों से कार्य करता है, उसको सभी प्रकार के कार्य करने का अनुभव होता है वह बगैर बताए ही अपनी समझदारी से कार्य करके समस्याओं का निराकरण कर लेता है।
अधिकारियों का कहना है कि आउटसोर्स कर्मी को हम ज्यादा नहीं बोल सकते हैं, क्योंकि उन्हें करंट का कार्य करने का अधिकार ही नहीं है। वहीं जबलपुर शहर में मकड़ी के जाल से भी घना उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचने वाला सर्विस लाइनों का जाल हो या ट्रांसफार्मर का तेल चेक करना हो, जैसे सभी कार्यों के लिए नियमित कर्मचारियों को कहना नहीं पड़ता, वो स्वतः ही इन कमियों को दूर कर देते हैं, क्योंकि उनके पास पोल पर चढ़कर करंट का कार्य करने आदि के अधिकार मिले हुए हैं।
हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सिटी सर्किल के अंतर्गत पांचों संभाग में उपभोक्ताओं की संख्या 3 लाख 82 हजार है, ट्रांसफार्मर की संख्या 5217 है, सब-स्टेशन की संख्या 56 है, आउटसोर्स कर्मी 778 हैं। नियमित कर्मी केवल 276 हैं, जिन्हें करंट का कार्य करने का अधिकार है। बाकी 778 आउटसोर्स कर्मियों को करंट का कार्य करने का अधिकार नहीं है। नियमित कर्मचारियों की अत्यधिक कमी होने से जबलपुर सिटी सर्किल की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है।
संघ के अजय कश्यप, मोहन दुबे, राजकुमार सैनी, लखन सिंह राजपूत, विनोद दास, शशि उपाध्याय, इंद्रपाल सिंह, अरुण मालवीय, ख्याली राम, महेश पटेल, मदन पटेल, दशरथ शर्मा आदि ने पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि आउटसोर्स कर्मियों का विद्युत कंपनी में संविलियन कर उन्हें करंट का कार्य करने का अधिकार देना चाहिए एवं ठेकेदारी प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त करना चाहिए।