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अच्छा नहीं हुआ: सय्यद ताहा कादरी

मैं क्या कहूं कि साथ मेरे क्या नहीं हुआ अच्छा भला किया था पर अच्छा नहीं हुआ कैसे करेगा मुझसे नदामत का तजकिरा जिसको कभी यक़ीन भी...

देखें हैं ख़्वाब मैंने: डॉ भावना श्रीवास्तव

इस बात पे यकीं है हर बात से ज़ियादामुझको मिला है मेरी औक़ात से ज़ियादा इक शाम बाम पे जो उतरा था इक सितारादेखे हैं...

आदमी का भरोसा नहीं: रकमिश सुल्तानपुरी

तुमने क़िरदार कोई भी परखा नहीं आजकल आदमी का भरोसा नहीं ख़्वाब कैसे बुने दायरों से अलग, जब किसी का यहां ख़्वाब पूरा नहीं जो मेरे दिल में...

मिल सका ना फिर हमें: रवि प्रकाश

मिल सका ना फिर हमें वो दीदार देखिए आज भी है आपका इंतजार देखिए रूठना तो ठीक है मुकरना सही न था अब न होगा फिर कभी...

उसकी खैरियत: संजय अश्क़

लबों पर तेरा नाम हो या ना हो मग़र, दिल की धड़कनें तेरे नाम से चलती है। जब भी उदास हो जाता हूं जीवन में, मन में...

खेत गधे चर गए: गौरीशंकर विनम्र

इधर से उधर गए। लग रहा सुधर गए। पुलिस और दुष्कर्मी पीड़ित के घर गए। फसल हुई अच्छी थी खेत गधे चर गए। विज्ञापन हुए नहीं खाली पद भर गए। खोज रहे...

आईना सच का: रकमिश सुल्तानपुरी

ज़ुर्म मेरा हो तो मुझको ही सताया जाए इश्क़ को बीच में ऐसे न घसीटा जाए इश्क़ तो पाक है महफ़ूज यहां हर कोई, दोस्त हो दोस्त...

चेहरा बना दिया: रकमिश सुल्तानपुरी

ख़ुशहाल जिंदगी का तमाशा बना दिया पल भर में आपने मुझे झूठा बना दिया सुनते भला कहाँ से मुहब्बत की चीख हम, जिस्मों की भूख ने हमें...

लोग बदल गए: मुकेश चौरसिया

वक्त जो बदला लोग बदल गए, सच के सब उपयोग बदल गए। पद, पैसा, सत्ता, मद, लालच, अब आदम के रोग बदल गए। तीन हुआ या पाँच हुआ...

नया वादा: जॉनी अहमद

आख़िर कैसे नए वादों पर ए'तिबार किया जाए पुरानी साज़िशों को कैसे दरकिनार किया जाए। क़ातिल क़त्ल की ताक़ में ज़मानों से सोया नहीं आख़िर सोए हुओं...

चलते कहाँ हैं: सुरेंद्र सैनी

लोग जो कहते हैं साथ चलते कहाँ हैं नींद से जागकर आँख मलते कहाँ हैं कुछ शख्स दुनिया में दबंग होते हैं ऐसे लोग कभी किसी से...

ऐसा इश्क किया था: मुकेश चौरसिया

हुआ तुम्हारा नाम बहुत, हम भी हुए बदनाम बहुत धन दौलत की लगी बोलियाँ, इश्क हुआ नीलाम बहुत तुमको आना था न आए, भेजे हम पैगाम बहुत बैठे रह गए...

श्री कृष्ण: आलोक कौशिक

सत्य के रक्षक अधर्म समापक दुष्ट विनाशी धर्म स्थापक हैं सुदामा सखा सुभद्रा पूर्वज देवकीनंदन वसुदेवात्मज वो पार्थसारथी गोप गोपीश्वर अजेय अजन्मा श्रीहरि दामोदर प्रेम के पर्याय परंतु वितृष्ण वो राधावल्लभ हैं वही श्री कृष्ण आलोक कौशिक साहित्यकार एवं पत्रकार मनीषा मैन्शन,...

आज भी तेरे चेहरे पे: सुरेंद्र सैनी

आज भी तेरे चेहरे पे चमक है नूर बचा जवानी का नमक है शहर भर में तेरे चाहने वाले दिवानों के लिए जैसे सबक है जो देखें तुझे...

भूल जाता हूँ: जॉनी अहमद

फ़िक्र-ए-फ़र्दा में लुत्फ़-ए-आज भूल जाता हूँ ख़स्ता-हाली में अपना मिज़ाज भूल जाता हूँ यूँ तो तबीब मुझसे बेहतर कोई नहीं ज़माने में बस एक अपनी अना का...

आइनों के राजमहल में: मुकेश चौरसिया

कितना कुछ करने को था, कितना सा कर पाये हम कुछ उधार की साँसे पाकर, जीवन भर इतराए हम आइनों के राजमहल में, कल तक अपना...

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