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नमन भास्कर देव: गौरीशंकर वैश्य

सूर्य देव तुमको नमन, कृपादृष्टिमय धूप। उर्वरता, जीवन, सृजन, हरीतिमा नव रूप।। सूर्य देव की कृपा से, पृथ्वी, चंद्र प्रसन्न। देते शुभ आशीष में, कंद-मूल, जल अन्न।। सूर्य...

लेकर आई लोहड़ी फिर से नूतन हर्ष: पूजा

लेकर आई लोहड़ी, फिर से नूतन हर्ष करते हैं हम सब कामना, मंगलमय हो नववर्ष।। शीतल-शीतल रात है,...

सिवाय मेरे: रूची शाही

तुम्हारी पसंद की चीज़ों सेअपना कमरा तो सजा लिया मैंनेपर कमरे में तुम्हारी अनुपस्थितिबहुत आहत करती है मुझे

हिंदी: गौरीशंकर वैश्य

जन-गण-मन का अनवरत घोषजय जय भारत, जय जय हिंदी व्यापक, सुग्राह्य, अति सहज सुगमभूमंडल की प्रिय जन...

आगे बढ़ा हुआ हाथ: जसवीर त्यागी

कभी-कभीसड़क पार करने से हिचकते हैं हमखड़े रहते हैंएक ही जगह पर देर तकमन की उलझन फैलती जाती है

भूख की तड़प: गरिमा गौतम

भूख से तड़पते देखाजब अपने जायों कोधधकी ज्वाला अंतस मेंपर दाना नहीं खिलाने को कंकाल सा तन...

इतना आसान कहाँ था गृहिणी होना: सुनीता करोथवाल

इतना आसान कहाँ था गृहिणी होनाचलती कलम छोड़ झाडू घसीटना दूध की मलाई खाना छोड़मक्खन के लिये...

तुम याद बहुत आए: संतोष सिंह

तुम याद बहुत आएजीवन के हर मोड़ परतुम याद बहुत आए पल पल तेरी बात निहारीकरवट करवट...

हे मोहन: ममता शर्मा

हे मोहन मुरलीधारीतोरी अखियां कजरारीबातें तोरी है प्यारीहे मोहन मुरलीधारीहे केशव, कुंजबिहारीसूरत तोरी है न्यारीजाऊँ मैं तुझपे बलिहारीहे केशव कुंजबिहारीहे नन्द...

ध्रुवतारा बन जाएंगे: प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

पुराना सब कुछ भुलाकर,नए साल मे कुछ ऐसा कर जाएंगे।सपनो के पंख लगाकर,आशाओं के फूल खिलाएंगे।। हिम्मत...

नव वर्ष की नई सुबह: सोनल ओमर

नूतन किरणें भर, खुशियों की प्याली लेकर आई है। एक नया संदेशा बनके नववर्ष की, नई सुबह आई है। आशा की लौ से...

अच्छा नहीं हुआ: सय्यद ताहा कादरी

मैं क्या कहूं कि साथ मेरे क्या नहीं हुआ अच्छा भला किया था पर अच्छा नहीं हुआ कैसे करेगा मुझसे नदामत का तजकिरा जिसको कभी यक़ीन भी...

गुरु: प्रियंका महंत

गुरु है तो जीवन सार्थक है तेरा जान, बिन गुरु जन्म निरर्थक है तेरा मान गुरु की सन्निधि, प्रवचन, आशीर्वाद व अनुग्रह, जिसे भी मिल जाये ये,...

ही लव्स मी: सपना भट्ट

मन के कबाड़खाने में बहुत सी स्मृतियाँ थीं स्मृतियों में दुःख थे दुःख प्रेम के पर्याय थे और प्रेम रुंधे कण्ठ से उपजी एक ध्वनि भर था कातर...

तुम नहीं जाते कभी: रूची शाही

तुम नहीं जाते कभी रह जाते हो मुझमें बचे-कुचे से हर बार खुरच कर हटा भी दूँ तो घाव से रह जाते हो विरह की ज्वाला बुझा दूं तो अलाव...

देखें हैं ख़्वाब मैंने: डॉ भावना श्रीवास्तव

इस बात पे यकीं है हर बात से ज़ियादामुझको मिला है मेरी औक़ात से ज़ियादा इक शाम बाम पे जो उतरा था इक सितारादेखे हैं...

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