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देश भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है रंगोत्सव, प्रधानमंत्री...

होलिका दहन के साथ ही देशभर में रंगों का त्यौहार उमंग, उत्साह और धूमधाम से मनाया जा रहा है। भोर के साथ ही देश...

होली आई रे- राम सेवक वर्मा

आई रे आई रे, होली आई रे। सबके मन को मस्त करे जो, दिल में प्रीति बसाई ये।। ग्वाल बाल सब मिलकर मन से, टोली एक बनाए हैं। खूब...

आज होगा होलिका दहन, कल खेली जाएगी होली

हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में होली के त्यौहार का विशेष धार्मिक महत्व होता है, हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात्रि...

होली के रास-रंग में- चन्द्र विजय प्रसाद चंदन

होली के रास-रंग में, बूढ़वन सब बौराये हैं पिचक चुके गालों पे, इत्र लगाके इतराए हैं फागुन के मस्ती में देखो कैसे जवानी छाइ है पोपले मुँह...

कौन-सा रंग- प्रीति शर्मा

कान्हा, तुम्हें कौन-सा रंग लगाऊं सूरज की, लाली को हाथों में भर, गालों को भर जाऊं कान्हा, तुम्हें कौन-सा रंग लगाऊं या फिर काले-काले बादल को, आँखों में भर जाऊं कान्हा, तुम्हें कौन-सा रंग लगाऊं सात रंग...

हरा गुलाबी नीला पीला- वीरेन्द्र तोमर

हरा गुलाबी नीला पीला रंगो ने कर दिया गीला फूलों से बनाये सारे रंग खेले राधिका कृष्णा संग सबसे गहरा प्यार का रंग मस्ती होवे भांग के संग आयी गर्मी,...

एक गुलाब- राजीव कुमार

कहाँ खिला सुंदर एक गुलाब सबके पास कहाँ बचा वह भाव जिसे हम प्यार अगन वन का कहते यह कोई नगर कल से सूना किस कोलाहल के पास ठहरकर यह...

रंग लगा दूँ मैं- तालिब मंसूरी

इजाज़त तेरी गर मिले तो होली पे रंग लगा दूँ मैं शायद इसी बहाने ही फिर गालों को सहला दूँ मैं काश कि फिर से लौट...

रंग से परहेज़ कैसा- रकमिश सुल्तानपुरी

आजकल है खुब चलन में झूठ का ये क्रेज़ कैसा? रंग सच का हो अगर तो रंग से परहेज़ कैसा? धर्म की पिचकारियों में द्वेष का भर रंग ताने। जाति की लेकर अबीरें छेड़ते कौमी...

जीत लें दिल- राम सेवक वर्मा

वक्त की ये ज़रूरत मेरे साथियों, चल सके न कोई बहाना है। जिन्दगी भर जिसे तुम छुटा न सको, रंग ऐसा हमें अब लगाना है। घोंटकर भाँग रख...

रंगों वाली खुशिया आयी- मनोज कुमार

गुनगुनाहट सी धूप छाई, अंगों में मस्ती भर आईं, आम के मौर भर आये, कोयल ने खड़ी शोर मचाई, लगता है रंगों वाली खुशियां आयी, आयी आयी रे होली...

फागुन में लग गई लगन- अशोक मिश्र

फागुन में लग गई लगन मौसम के हाथ हुए पीले। बालियाँ जवान हो गईंं, रात-रात देखतीं सपन, अंग-अंग उम्र का नशा, पोर-पोर चंपई छुवन। कान तक खिंचें हैं काम-बान, फूलों के...

अब बेहद खुश हो- राजीव कुमार

होली में रंग बरसे गुलाल मिट्टी की सुरभि से खूब भरा मन अब धूप में डूबा मन का ताल सूरज ने आज समेटा बची ठंड का जाल नयी साड़ी में तुम घर...

चलो मिलकर होली मनाते है- संतोष कुमार वर्मा

चलो पुरानी रंजीसे भूल जाते हैं धुन प्यार का गुनगुनाते हैं और कोई न बच पाए इस होली में चलो मिलकर होली मानते हैं । जात धर्म मजहब...

होली- आनंद चौहान

उन्माद से परिपूर्ण प्रकृति पल्लवित है बगिया इतरा रही पेडों की शाखें कर रही हवा से अठखेलियाँ कट रही फसलें गेंहू की उल्लसित है खेत किसान का टेसुओं ने ओढ़...

यारों की होली- राजन गुप्ता

यारों के संग मिलकर होली मनाएंगे गुझिया, पापड़ और भांग संग में खाएंगे घर घर में खुशियों की ढ़ोल बजायेंगे भौजी के संग, अंग-अंग में रंग लगाएंगे लाल,...

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