Friday, April 24, 2026
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Holi 2026: होलिका दहन की तारीख स्पष्ट, 2 मार्च को जलेगी होलिका

होली 2026 की तिथियों को लेकर चंद्र ग्रहण के कारण जो भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, वह अब पूरी तरह साफ हो गई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार प्रदोषकाल-व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च 2026, सोमवार को पड़ रही है, इसलिए इसी दिन होलिका दहन किया जाएगा।

इसके अगले दिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगेगा और 4 मार्च, बुधवार को रंगों वाली होली (धुलेंडी) मनाई जाएगी। तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।


पूर्णिमा तिथि और होलिका दहन का समय

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 2 मार्च 2026, शाम 5:55 बजे

  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 3 मार्च 2026, शाम 5:07 बजे

धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की प्रदोषकाल में किया जाता है। चूंकि 3 मार्च को पूर्णिमा शाम तक ही रहेगी और उसी दिन चंद्र ग्रहण भी है, इसलिए 2 मार्च को ही होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है।


भद्रा काल का विशेष ध्यान

2 मार्च को भद्रा काल शाम 5:58 बजे से शुरू होकर 3 मार्च सुबह 5:30 बजे तक रहेगा।
भद्रा मुख मध्यरात्रि 2:38 बजे से 4:34 बजे तक रहेगा।

ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार होलिका दहन भद्रा काल में नहीं किया जाता, इसलिए इसे भद्रा शुरू होने से पहले करना शुभ रहेगा।

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग विधि-विधान से लकड़ियों का ढेर सजाकर पूजा करते हैं और अग्नि प्रज्वलित करते हैं। नई फसल की बालियां अग्नि में अर्पित कर समृद्धि की कामना की जाती है।


3 मार्च: चंद्र ग्रहण का प्रभाव

3 मार्च, मंगलवार को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। सूतक काल सुबह 6:23 बजे से प्रारंभ हो जाएगा।

ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और श्रद्धालु मंत्र जाप एवं ध्यान करेंगे। वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब लगता है, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।


4 मार्च: रंगों की होली (धुलेंडी)

4 मार्च, बुधवार को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर रंगों वाली होली खेली जाएगी। इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलते हैं और भाईचारे का संदेश देते हैं।

विशेष रूप से Mathura और Vrindavan की होली विश्वप्रसिद्ध है, जहां कई दिनों तक उत्सव का माहौल बना रहता है।

होली का यह पर्व भक्त प्रह्लाद की आस्था और बुराई के अंत का प्रतीक है, जो हर वर्ष समाज को सत्य और धर्म की राह पर चलने का संदेश देता है।

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