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प्रेम-प्रीत की भाषा: वीरेंद्र प्रधान

रोज कमा कर खा लेंगे हमइसमें ही सुख पा लेंगे हममेहनत की रोटी नित खाकरनींद सहज ही बुला लेंगे हम

नादान परिंदा: स्नेहलता नीर

बेज़ान शह्र में, पत्थर का बशर था।घर-घर में तनाज़ा, हर सम्त गदर था। नफ़रत के ज़ह्र का,...

मन मंदिर में: स्नेहलता नीर

मन के मंदिर में श्रद्धा से, रघुनन्दन की मूर्ति सजाएँ रात अमावस तम गहराया, दिव्य दीप-वर्तिका जलाएँ एक नहीं दस-दस दसकंधर, आज स्वयं के भीतर पलते मर्यादित...

प्रेम सुधा रसधारे: स्नेहलता नीर

बरस बाद सावन बन, साजन आए हैं सखि पास हमारे। सरसाया मन का वृंदावन, पाकर प्रेम सुधा-रसधारे।। उत्सव मना रहीं हैं साँसें, धड़कन बजा रही शहनाई। पलक...

रंग जीवन के: मुकेश चौरसिया

कभी हलके कभी गहरे, बिखरे रंग जीवन के। सिखाते नित नये ककहरे रंग जीवन के।। सुहानी भोर सी खुशियाँ, जीवन में कभी लाली, कभी खत्म न हो जैसे, कभी...

जब प्यार की खुशबू: रामसेवक वर्मा

देख रही हो छुप-छुपकर क्यों, दिल का दर्द बढ़ा कर तुम महका दो ये गुलशन मेरा, जीवन पुष्प खिलाकर तुम चांद सी सुंदर एक प्यारी सूरत, मन को लुभाया...

प्रतीक्षा के घावों पर: स्नेहलता नीर

पिया गए परदेश न लौटे, अब तक मन अकुलाए। चिंतन में पीड़ा के बादल, लौट-पौट गहराए विरह-ज्वाल सुलगाती साजन, रूठी निंदिया रानी। तारे गिनती रात बिताती, मेरी...

हे मनमोहन कृष्ण मुरारी: स्नेहलता नीर

हे मनमोहन कृष्ण मुरारी, मेरी कुटिया में आ जाना। दधि माखन श्रीखंड मलाई, बैठ चाव से गिरधर खाना।। आज काल विकराल रूप धर, तांडव करता इस धरती पर। मेल-मिलाप रुद्ध...

रूठ गए श्याम मेरे: ज्योति अग्निहोत्री

रूठ गए श्याम मेरे, कैसे मैं मनाऊँगी? भई आधी रतिया है, मैं घर कैसे जाऊँगी? राधा नाहीं गोपी नाहीं, मीरा मैं बन जाऊंगी। विष का ये प्याला सखी, हँसके मैं पी...

साथी तुम आवाज़ न दो: रूची शाही

सौ आँसू रखकर आँखों मेंतोड़ गए तुम नेह के बंधनदीद को तेरे तड़प तड़प केबरस रहा आँखों से सावनजो होना...

चाहत है दिल में: रामसेवक वर्मा

रूठे सजन को, मनाऊं मैं कैसे चाहत है दिल में, दिखाऊं मैं कैसे मिले चाहे दुनिया में, कितने हमें ग़म नहीं जी सकेंगे, तुम्हारे बिना हम जमाने को...

सावन का महीना: सोनल ओमर

बंजर धरती पर जब हरियाली लहराये। उदास सूना-सूना दिल भी खिल-खिल जाये। उमड़-उमड़ के बादल गरजने लग जाये। जब सावन का महीना झूम-झूम कर आये।। कलियाँ फूल बने...

सुध मेरी तुम ले लेना- रामसेवक वर्मा

लिखकर खत मैं भेज रही हूं, मां को भी ये, दे देना जी न सकूं मैं अधिक दिनों तक, सुध मेरी तुम, ले लेना बादल छाए संकट के...

मीत का समर्पण- सोनल ओमर

प्रेम में समर्पित एक प्रीत माँगू। मैं ईश्वर से अपने लिए मीत माँगू।। जो स्त्री-पुरूष समता में विश्वास करे। मेरी भावनाओं का भी सम्मान करे।। ऐसा स्वयं के...

बहुत याद आए, सजन अब तुम्हारी- रामसेवक वर्मा

कई रातें तुम बिन हैं, हमने गुजारी बहुत याद आए, सजन अब तुम्हारी कहां तुम गए हो, नहीं जानते हैं आंसू भी रुकना, कहां मानते हैं दिल में...

मैं कवि नहीं हूँ- रामसेवक वर्मा

मैं कवि नहीं हूँ फिर भी, कविता लिख रहा हूँ दिल की आवाज को मैं, आपके सामने रख रहा हूँ सोचता हूं कि कोई मुझे कवि बना दे कविता...

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