मंत्री विजयवर्गीय के अनुसार मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के दायरे में आने वाले सभी नगरीय निकाय कर्मचारियों को इस योजना का लाभ मिलेगा. यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसके आश्रितों को अनुग्रह अनुदान प्रदान किया जाएगा. इससे परिवार को अचानक उत्पन्न होने वाले आर्थिक संकट से उबरने में सहायता मिलेगी और उन्हें तत्काल वित्तीय सहयोग उपलब्ध हो सकेगा.
सरकार द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कर्मचारी के बैंड वेतन और ग्रेड पे के सम्मिलित योग के छह गुना के बराबर राशि अनुग्रह अनुदान के रूप में दी जाएगी. हालांकि इस सहायता राशि की अधिकतम सीमा एक लाख पच्चीस हजार रुपये निर्धारित की गई है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को प्रारंभिक आर्थिक सहारा मिल सके और उसकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति में कठिनाई न आए.
प्रदेश के नगरीय निकायों में हजारों कर्मचारी विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं. इनमें सफाई व्यवस्था, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, कर संग्रहण, कार्यालयीन कार्य और नागरिक सुविधाओं से जुड़े अनेक विभाग शामिल हैं. ये कर्मचारी शहरों की मूलभूत व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में सरकार का यह निर्णय उनके योगदान को सम्मान देने और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी और अर्धसरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अत्यंत आवश्यक हैं. कई बार परिवार का पूरा आर्थिक आधार एक ही कर्मचारी पर निर्भर होता है. ऐसे में अचानक मृत्यु की स्थिति परिवार को गंभीर आर्थिक संकट में डाल देती है. सरकार द्वारा दिया जाने वाला अनुग्रह अनुदान भले ही दीर्घकालिक समाधान न हो, लेकिन कठिन समय में यह एक महत्वपूर्ण सहायता साबित हो सकता है.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निर्णय एक अप्रैल 2025 से प्रभावी माना जाएगा. अर्थात एक अप्रैल 2025 या उसके बाद सेवा के दौरान मृत्यु के सभी पात्र मामलों में इस व्यवस्था का लाभ दिया जाएगा. इससे उन परिवारों को भी राहत मिलेगी जिनके सदस्य की मृत्यु पिछले वर्ष के बाद हुई है और जो इस सहायता के दायरे में आते हैं.
नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया भी तय की जा रही है ताकि पात्र परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके. विभागीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद संबंधित निकायों के माध्यम से दावों का परीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
सरकार के इस फैसले का कर्मचारियों के संगठनों ने भी स्वागत किया है. उनका कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है. कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में यह कदम भविष्य में अन्य कल्याणकारी योजनाओं का आधार भी बन सकता है.
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को सरकार की कर्मचारी हितैषी नीति का हिस्सा माना जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार विभिन्न वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है. इसी क्रम में नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए लिया गया यह निर्णय न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करेगा बल्कि कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत करेगा. आने वाले समय में इस योजना का लाभ प्रदेश के हजारों कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को मिलने की उम्मीद है.











