Thursday, October 22, 2026
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MP : जटाशंकर धाम में प्रकृति का अनोखा चमत्कार, गोमुख से शिवलिंग पर बरसी जलधारा

MP के छतरपुर जिले में स्थित जटाशंकर धाम भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जिसे ‘बुंदेलखंड का केदारनाथ’ भी कहा जाता है। मशहूर जटाशंकर धाम में कुदरत का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जिसका वीडियो देख आप भी मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। ‘बुंदेलखंड का केदारनाथ’ कहे जाने वाले इस पुराने शिव मंदिर में दो दिन की भारी बारिश के बाद ‘गोमुख’ से पानी का जबरदस्त बहाव शुरू हो गया। इस नजारे को भक्त किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। नजारा मनमोहक बना हुआ है, लेकिन लगातार बारिश से कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। मंदिर के आंगन में पानी जमा हो गया है और पास की नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है, जिसके कारण अधिकारियों ने पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

जटाशंकर धाम में प्रकृति का अद्भुत रूप

जब इलाके में मूसलाधार बारिश हुई तो गोमुख से पानी बहुत तेजी से बहने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे जटाधारी भगवान शिव का बारिश के पानी से अभिषेक हो रहा हो। शिवलिंग का मानो कुदरती ‘जलाभिषेक’ हो रहा था और पूरा मंदिर गहरे भक्ति-भाव और कुदरती सुंदरता से भर गया था। इस अनोखी घटना ने इस पवित्र जगह को एक शानदार नजारे में बदल दिया, जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत मेल देखने को मिला। इस खूबसूरत पल का वीडियो भी छाया हुआ है।

जटाशंकर धाम से अद्भुत वीडियो वायरल

गोमुख से पानी का तेज बहाव और आस-पास की पहाड़ियों से गिरते झरने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। स्थानीय भक्तों ने इस मनमोहक नजारे को कैमरे में कैद किया और पोस्ट कर दिया। अब सोशल मीडिया पर जटाशंकर धाम का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सभी आध्यात्मिक लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंच लिया। पुराने शिवलिंग पर कुदरती रूप से बहते पानी का यह नजारा लोगों को बहुत पसंद आ रहा है और कई लोग इसे मॉनसून के मौसम में भगवान का आशीर्वाद मान रहे हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में जटाशंकर धाम का विशेष महत्व है। माना जाता है कि यहीं भगवान शिव ने अपनी जटाओं के बीच ध्यान किया था। गोमुख से बहने वाली प्राकृतिक जलधारा को साल भर पवित्र माना जाता है, लेकिन मॉनसून के दौरान बढ़े हुए जलप्रवाह ने इस अद्भुत घटना को देखने वाले हजारों तीर्थयात्रियों के आध्यात्मिक अनुभव को और भी खास बना दिया है।

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