जबलपुर । रीवा क्षेत्र में आई बाढ़ एवं अतिवृष्टि की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की महिला अधिकारी सोनाली श्रीवास्तव की सतर्कता, नेतृत्व क्षमता और त्वरित निर्णयों ने शहर की विद्युत ट्रांसमिशन व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगातार भारी वर्षा और बाढ़ की आशंका के दौरान उनके निर्देशन में रीवा क्षेत्र के सभी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों पर 48 घंटे तक पल पल निगरानी रखी गई।
टेस्टिंग संभाग रीवा की कार्यपालन अभियंता सोनाली श्रीवास्तव ने मैदानी अमले के साथ लगातार 48 घंटे तक स्थिति की मॉनिटरिंग की तथा आवश्यक निर्देश जारी किए। उनकी सक्रियता के कारण रीवा शहर के 132 केवी रीवा-1 (रेलवे स्टेशन के निकट), 132 केवी रीवा-2 (सगरा) तथा 220 केवी रीवा (सिलपरा) जैसे महत्वपूर्ण एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों में वर्षा जल का जमाव नहीं होने दिया गया।
रीवा के सबसे महत्वपूर्ण 132 केवी सबस्टेशन रीवा 1 सबसे ज्यादा संवेदनशील था क्योंकि सब स्टेशन के किनारे से ही रेलवे की पानी निकासी होती है जिसके कारण भारी बारिश के दौरान सब स्टेशन में जल प्रवेश की आशंका बनी रहती है।
जल भराव होने पर यह होता संकट–
एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों में जलभराव होने पर ट्रांसफार्मर, कंट्रोल एवं प्रोटेक्शन सिस्टम, केबल ट्रेंच तथा अन्य संवेदनशील विद्युत उपकरणों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में बड़े क्षेत्र की विद्युत ट्रांसमिशन व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ प्रशासन द्वारा संचालित राहत एवं बचाव कार्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता।
इसी जोखिम को देखते हुए संभावित जलभराव वाले सभी स्थानों की अग्रिम पहचान कर विशेष निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
अलर्ट मोड पर रही ट्रांसको टीम-
भारी वर्षा की चेतावनी मिलते ही जल निकासी नालियों की विशेष सफाई कराई गई, अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की गई तथा आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की अग्रिम तैनाती की गई।
संवेदनशील स्थानों पर लगातार निरीक्षण किया गया और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीम को पूरी तरह तैयार रखा गया।
ट्रांसमिशन व्यवस्था बनी रही निर्बाध-
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप न केवल रीवा शहर के महत्वपूर्ण सबस्टेशन सुरक्षित रहे, बल्कि पूरे क्षेत्र की ट्रांसमिशन व्यवस्था भी निर्बाध बनी रही। यदि इन सबस्टेशनों में जलभराव के कारण ट्रांसमिशन व्यवस्था प्रभावित होती, तो नागरिकों के साथ-साथ जिला प्रशासन को भी राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था।
रीवा के अतिरिक्त यहां भी की गई सुरक्षा सुनिश्चित
रीवा शहर के अतिरिक्त 220 केवी सिरमौर तथा 132 केवी अटरैला, कटरा, मऊगंज, मंगावां, रामपुर नैकिन एवं रामपुर बघेलान एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों पर भी विशेष निगरानी रखी गई। एमपी ट्रांसको का मैदानी अमला पूरे समय सक्रिय रहा और सभी संवेदनशील विद्युत पारेषण उपकरण की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
इंदौर के बाद रीवा की पारेषण व्यवस्था महिला अधिकारी के हाथों में
उल्लेखनीय है कि इंदौर के बाद रीवा ऐसा दूसरा प्रमुख शहर है, जहां एमपी ट्रांसको ने विद्युत ट्रांसमिशन व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक महिला अधिकारी को सौंपी है। मध्यप्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी इंदौर की संपूर्ण ट्रांसमिशन व्यवस्था भी महिला अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित हो रही है।
इसी क्रम में रीवा जैसे महत्वपूर्ण शहर में भी ट्रांसमिशन व्यवस्था की जिम्मेदारी महिला अधिकारी को सौंपे जाने का निर्णय सकारात्मक परिणाम दे रहा है।
उल्लेखनीय रही महिला अधिकारी की भूमिका-
बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों में सोनाली श्रीवास्तव द्वारा प्रदर्शित नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और त्वरित निर्णय क्षमता ने यह सिद्ध किया है कि महिला अधिकारी विद्युत ट्रांसमिशन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। रीवा क्षेत्र में बाढ़ के दौरान ट्रांसमिशन व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।











