जबलपुर। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से से लेकर पश्चिमी इलाकों तक कई जगहों पर हल्की से लेकर तेज और अति तेज बारिश का दौर जारी है। इसके साथ ही कई जिलों में गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को भी प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसी बीच भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले घंटों में कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। खासकर बारिश और आंधी के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। वहीं, वाहन चालकों को भी सावधानी से सफर करने और मौसम का ताजा अपडेट देखने के बाद ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
बैतूल समेत 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, अति तेज बारिश का खतरा
मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को बैतूल, दमोह, टीकमगढ़, राजगढ़ और नरसिंहपुर जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में अति तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। अनुमान के मुताबिक, कुछ स्थानों पर 115.6 मिलीमीटर से लेकर 204.4 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की जा सकती है।
इसके अलावा इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की भी संभावना है। इसलिए इन जिलों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर बारिश के दौरान निचले इलाकों, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखना जरूरी होगा।
वहीं, तेज हवा के दौरान कमजोर पेड़ों, बिजली के खंभों और निर्माणाधीन ढांचों के आसपास जाने से बचना चाहिए। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले IMD की वेबसाइट और स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देखें। इसके अलावा अगर यात्रा बेहद जरूरी नहीं है, तो खराब मौसम के दौरान इसे कुछ समय के लिए टालना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
20 जिलों में येलो अलर्ट, गरज-चमक के साथ होगी भारी बारिश
वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इनमें सीधी, सिंगरौली, शहडोल, मंडला, जबलपुर, कटनी, पन्ना, छतरपुर, सागर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, गुना, आगर-मालवा और शाजापुर शामिल हैं।
इन जिलों में 64.5 मिलीमीटर से लेकर 115.5 मिलीमीटर तक बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही कई स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं का असर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि येलो अलर्ट ऑरेंज अलर्ट की तुलना में कम गंभीर चेतावनी है, लेकिन मौसम के अचानक बदलने की स्थिति में लोगों को सतर्क रहना जरूरी है।
खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले लोगों और खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को आकाशीय बिजली से बचाव के लिए सावधानी बरतनी होगी। वहीं, जबलपुर समेत पूर्वी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बारिश के कारण सड़क और निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।
आंधी और वज्रपात के दौरान रखें खास सावधानी
बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए आम नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सबसे पहले गरज-चमक शुरू होते ही खुले स्थानों से निकलकर सुरक्षित भवन के अंदर पहुंचना बेहतर होगा। हालांकि, पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे खड़े होकर बारिश से बचने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसे स्थानों पर वज्रपात का खतरा अधिक हो सकता है।
इसके अलावा घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिजली गिरने की आशंका के दौरान प्लग से निकाल देना सुरक्षित रहेगा। वहीं, आंधी-तूफान के समय खुले मैदान, खेत, निर्माण स्थल और बिजली की लाइनों के आसपास जाने से बचना चाहिए।
वाहन चलाने वालों को भी बारिश और तेज हवा के दौरान गति कम रखनी चाहिए और स्टीयरिंग पर मजबूत पकड़ बनाए रखनी चाहिए। साथ ही कंक्रीट की दीवारों से टिककर खड़े होने या कंक्रीट के फर्श पर लेटने से भी बचना चाहिए। इस तरह थोड़ी सी सावधानी बरतकर खराब मौसम के दौरान होने वाले हादसों का खतरा कम किया जा सकता है।
पशुपालक भी रहें अलर्ट, खुले मैदान और जलस्रोतों से दूर रखें पशु
इधर, मौसम विभाग ने पशुपालकों के लिए भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। बारिश, आंधी और वज्रपात के दौरान पशुओं को खुले मैदान, तालाब, नदी या किसी अन्य जलस्रोत के पास छोड़ने से बचना चाहिए। खासकर रात के समय सभी पशुओं को सुरक्षित और संरक्षित शेड में रखना जरूरी है।
वहीं, तेज गर्मी और उमस वाले समय में पशुओं को लंबे समय तक खुले में चरने के लिए छोड़ने से बचना चाहिए। इसके अलावा उनके लिए पर्याप्त पीने के पानी और छायादार स्थान की व्यवस्था करना भी जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आकाशीय बिजली और तेज तूफान के दौरान पशुओं को किसी बड़े पेड़ के नीचे बांधकर नहीं रखना चाहिए। दरअसल, खुले मैदान में अकेला पेड़ वज्रपात के दौरान खतरे का कारण बन सकता है।
इसलिए पशुपालकों को मौसम का अपडेट देखते रहना चाहिए और खराब मौसम की स्थिति में पहले से ही पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा देना चाहिए। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में मंगलवार को बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है और पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट के साथ कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में प्रशासन और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करना ही सबसे सुरक्षित कदम रहेगा।











