Monday, June 15, 2026
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आदिवासी युवक की आत्महत्या के मामले में SC ने राज्य सरकार से मांगा जबाव

सागर। एमपी के सागर जिले के बहुचर्चित नीलेश आदिवासी सुसाइड केस में बीजेपी नेता गोविंद सिंह राजपूत (मालथौन) की याचिका पर बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से और वक्त मांगा है।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर 15 मार्च 2026 तक जांच की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।

यह जांच सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत गठित एसआईटी कर रही है। यह मामला सागर जिले के मालथौन का है। जहां पिछले साल नीलेश आदिवासी नामक युवक ने आत्महत्या कर ली थी। पीडि़त की पत्नी रेवा आदिवासी ने यह आरोप लगाए थे कि स्थानीय विधायक भूपेन्द्र सिंह के दबाव के कारण उसके पति ने आत्महत्या की है।

इस मामले से जुड़े तीन मामलों जिनमें एक असामान्य मृत्यु (मर्ग) व दो आपराधिक प्रकरण शामिल हैं। सागर जिले के मालथौन थाना क्षेत्र में नीलेश आदिवासी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गयाए लेकिन परिवार ने आरोप लगाए कि नीलेश को लगातार मानसिक प्रताडऩा और दबाव में रखा गया था। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।

मौत के बाद पुलिस ने मर्ग असामान्य मृत्यु कायम कर जांच शुरू की। परिजनों के बयानों के आधार पर बाद में मालथौन थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए। कुल मिलाकर तीन केस दर्ज हुए जिनमें दो आपराधिक प्रकरण और एक मर्ग शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को इस मामले में सीबीआई जांच से इनकार करते हुए राज्य स्तर पर एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे और एक महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा था ।

कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 12 दिसंबर 2025 को एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी में दूसरे राज्य के मूल निवासी डीआईजी रैंक के अधिकारी को एसआईटी चीफ बनाने के साथ ही एमपी के बाहर के एक आईपीएस और एक महिला डीएसपी को शामिल करने के आदेश दिए थे। इस टीम को सभी संबंधित एफआईआर व रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर जांच करने के निर्देश दिए गए थे। राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर आवेदन में कहा गया है कि एसआईटी ने तीनों मामलों में रिकॉर्ड की स्वतंत्र और गहन जांच की है।

एक केस की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और फाइनल रिपोर्ट तैयार की जा रही है कई मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। ये डिवाइस साइबर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना जांच को अंतिम रूप देना संभव नहीं है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि देरी न तो जानबूझकर है और न ही लापरवाही के कारणए बल्कि जांच की प्रकृति और तकनीकी साक्ष्यों की वजह से हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मृतक की पत्नी रेवा आदिवासी सहित सभी कमजोर गवाहों को प्रभावित न किए जाने के निर्देश मृतक के भाई नीरज आदिवासी और उनके परिवार के खिलाफ कोई एक्शन न लेने का आदेश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि ैप्ज् को 15 मार्च 2026 तक का अतिरिक्त समय दिया जाए या नहीं और क्या जांच की प्रगति संतोषजनक मानी जाए।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है। सागर के बहुचर्चित निलेश आदिवासी सुसाइड मामले में पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह की भूमिका की जांच होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि मामले की परिस्थितियां निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करती हैं और स्थानीय पुलिस से ऐसी जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती

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