सीधी जिले में स्थित संजय टाइगर रिजर्व की मोहन रेंज एक बार फिर बाघों की चहलकदमी से गुलजार हो उठी है। यह वही इलाका है जो कभी प्रसिद्ध सफेद शेर मोहन के नाम से पहचाना जाता था। वर्षों तक वीरान रहने के बाद अब यहां फिर से वन्यजीवों की रौनक लौटती दिखाई दे रही है।
बाघों का परिवार बना आकर्षण का केंद्र
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मोहन रेंज में तीन बाघ, दो बाघिन और उनके पांच शावक देखे गए हैं। बताया जा रहा है कि रिजर्व प्रबंधन ने कुछ समय पहले एक बाघ और एक बाघिन को इस क्षेत्र में छोड़ा था। अब वही जोड़ा अपने शावकों के साथ जंगल में सक्रिय नजर आ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि बाघों की यह स्थायी मौजूदगी रिजर्व के लिए सकारात्मक संकेत है। विभागीय टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है, ताकि सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
नॉन-टूरिज्म जोन से इको-टूरिज्म की ओर
फिलहाल मोहन रेंज को नॉन-टूरिज्म क्षेत्र घोषित किया गया है। हालांकि, दुबरी रेंज की तर्ज पर यहां भी सफारी शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है।
वन अधिकारियों का मानना है कि यदि बाघों की गतिविधि इसी तरह बनी रहती है, तो भविष्य में यहां इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है। इससे न केवल क्षेत्र की पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।
जंगल में लौटी रौनक
सफेद बाघ मोहन के इस क्षेत्र से हटने के बाद यहां सन्नाटा पसर गया था। अब बाघों की वापसी ने जंगल को फिर से जीवंत कर दिया है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए यह एक उत्साहजनक संकेत माना जा रहा है।











