WCR News: भारतीय रेल लगातार अपने नेटवर्क को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण रेलखंडों के लिए दो बड़े सिग्नलिंग आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के जरिए अब पारंपरिक सिग्नलिंग सिस्टम की जगह अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर जैसी हाईटेक तकनीक लगाई जाएगी।
रेलवे द्वारा स्वीकृत इन दोनों परियोजनाओं की कुल लागत करीब 665.14 करोड़ रुपए बताई गई है। इन प्रोजेक्ट्स से पश्चिम मध्य रेल के कुल 43 स्टेशनों को फायदा मिलेगा। रेलवे का मानना है कि इन तकनीकों के लागू होने के बाद ट्रेन संचालन पहले से ज्यादा सुरक्षित, तेज और व्यवस्थित हो जाएगा।
WCR News: क्या है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम?
भारतीय रेल अब पुराने पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम को हटाकर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग तकनीक अपना रही है। यह एक कंप्यूटर बेस्ड स्मार्ट सिग्नलिंग सिस्टम होता है जो ट्रेनों की मूवमेंट को ऑटोमैटिक तरीके से कंट्रोल करता है।
इस सिस्टम के जरिए किसी भी मानवीय गलती की संभावना काफी कम हो जाती है। ट्रेन किस ट्रैक पर जाएगी, कौन सा सिग्नल कब खुलेगा और किस रूट पर कौन सी ट्रेन भेजनी है, यह सब इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तय किया जाता है। इससे दुर्घटनाओं की संभावना घटती है और ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित बनता है।

WCR News: MSDAC सिस्टम से और मजबूत होगी सुरक्षा
रेलवे ने ट्रैक सर्किट के समानांतर मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर यानी MSDAC सिस्टम लगाने का फैसला भी लिया है। यह तकनीक ट्रैक पर ट्रेन की वास्तविक स्थिति को बेहद सटीक तरीके से मॉनिटर करती है।
जब कोई ट्रेन किसी सेक्शन से गुजरती है तो यह सिस्टम उसके पहियों की गिनती करके ट्रैक की उपलब्धता की जानकारी देता है। इससे यह पता चलता रहता है कि ट्रैक खाली है या किसी ट्रेन की मौजूदगी है। यह तकनीक खराब मौसम या तकनीकी खराबी के दौरान भी काफी भरोसेमंद मानी जाती है।
WCR News: इटारसी-जबलपुर रेलखंड को मिलेगा बड़ा फायदा
रेलवे की पहली परियोजना इटारसी-जबलपुर रेलखंड से जुड़ी है। इस सेक्शन के 19 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम को हटाकर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और MSDAC तकनीक स्थापित की जाएगी।
इस काम पर करीब 271.31 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इटारसी-जबलपुर रूट देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल माना जाता है। यहां से रोजाना बड़ी संख्या में मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में नई तकनीक से ट्रैफिक मैनेजमेंट पहले से ज्यादा बेहतर होगा।
WCR News: जबलपुर-मानिकपुर रेलखंड भी होगा हाईटेक
दूसरी परियोजना जबलपुर-मानिकपुर रेलखंड के लिए स्वीकृत की गई है। इस रेलखंड के 24 स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और MSDAC सिस्टम लगाया जाएगा।
इस परियोजना पर लगभग 393.83 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक यह रूट भी अत्यधिक उपयोग वाले नेटवर्क में शामिल है, जहां सुरक्षा और ट्रैफिक कंट्रोल को मजबूत करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

WCR News: हाई डेंसिटी नेटवर्क पर फोकस
भारतीय रेल अब उन रेल मार्गों पर तेजी से आधुनिकीकरण कर रही है जहां ट्रेनों की संख्या अधिक है। इन्हें हाई डेंसिटी नेटवर्क और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क कहा जाता है।
इन रूट्स पर पहले से ही कवच, ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को लागू करने का काम चल रहा है। अब इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग जुड़ने से रेलवे का सुरक्षा कवच और मजबूत हो जाएगा।
WCR News: क्या है ‘कवच’ तकनीक?
भारतीय रेल द्वारा विकसित कवच तकनीक एक स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसका मकसद ट्रेन टक्कर जैसी घटनाओं को रोकना है।
अगर किसी कारण से लोको पायलट सिग्नल नहीं देख पाता या ट्रेन निर्धारित गति से ज्यादा तेज चलने लगती है, तो कवच सिस्टम अपने आप ट्रेन की स्पीड नियंत्रित कर देता है। रेलवे अब धीरे-धीरे देश के व्यस्त रेल रूट्स पर इस तकनीक को लागू कर रहा है।
WCR News: यात्रियों को क्या होगा फायदा?
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रियों को कई बड़े फायदे मिलने वाले हैं। सबसे पहले ट्रेन संचालन ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा। इसके अलावा सिग्नल फेल होने जैसी समस्याएं कम होंगी और ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा।
नई तकनीक के जरिए रेलवे लाइन की क्षमता भी बढ़ेगी, जिससे एक ही रूट पर ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी कम होने की उम्मीद है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सिग्नलिंग सिस्टम रखरखाव के मामले में भी ज्यादा आसान और भरोसेमंद होता है। इससे तकनीकी खराबियों को जल्दी ठीक किया जा सकेगा।

WCR News: रेलवे के लिए क्यों जरूरी है आधुनिकीकरण?
देश में तेजी से बढ़ती रेल यात्रियों की संख्या और माल परिवहन की जरूरतों को देखते हुए रेलवे लगातार आधुनिक तकनीकों को अपना रहा है। पुराने सिस्टम अब बढ़ते ट्रैफिक को संभालने में सक्षम नहीं माने जा रहे।
इसी वजह से रेलवे अब डिजिटल और ऑटोमेटेड सिस्टम की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि परिचालन लागत भी कम होगी और ट्रेनों की रफ्तार में सुधार आएगा।
WCR News: पश्चिम मध्य रेल बनेगा और आधुनिक
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पश्चिम मध्य रेल देश के सबसे आधुनिक रेल जोनों में शामिल हो सकता है।
जबलपुर, इटारसी और मानिकपुर जैसे महत्वपूर्ण रेलखंडों पर हाईटेक सिग्नलिंग सिस्टम लगने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का संचालन ज्यादा सुचारु होगा। आने वाले समय में यात्रियों को तेज, सुरक्षित और बेहतर रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा।











