Sunday, September 6, 2026
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CM Vijay : ‘मुझे मजबूर मत करो…’ भ्रष्टाचार की फाइलें खोलने की चेतावनी पर तमिलनाडु की सियासत गरम

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के प्रस्ताव और सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के बीच टकराव बढ़ गया है। बुधवार को सदन में बहस के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल से जुड़ी कथित भ्रष्टाचार की फाइलें सार्वजनिक करने की चेतावनी देकर सियासी माहौल और गरमा दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसी दो फाइलें हैं, जिन्हें उचित समय आने पर सार्वजनिक किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के आसार हैं।

मुख्यमंत्री विजय ने तीखे अंदाज में कहा कि वह पिछली सरकार से संबंधित भ्रष्टाचार की फाइलें उचित समय पर सामने लाएंगे और उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए. उनका यह बयान उस समय आया, जब सदन में सड़क निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस चल रही थी. इससे पहले मंगलवार को भी मुख्यमंत्री कार्यालय को स्थानांतरित करने के लिए जारी 5.54 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई थी.

विवाद की शुरुआत मुख्यमंत्री कार्यालय को फोर्ट सेंट जॉर्ज स्थित मौजूदा परिसर से हटाकर उसी सचिवालय परिसर में स्थित नामक्कल कविन्यार मालिगई में स्थानांतरित करने की योजना से हुई. डीएमके विधायक ईवी वेलु ने विधानसभा में इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि टेंडर की सूचना अखबार में प्रकाशित हुई, लेकिन आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराई गई. उन्होंने सचिवालय में काम करने वाले कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए और मुख्यमंत्री से इस पहलू पर विचार करने का आग्रह किया.

सरकार की ओर से लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने इन आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय को स्थानांतरित करने का फैसला किसी व्यक्तिगत सुविधा या विलासिता के लिए नहीं लिया गया है. उनके मुताबिक मौजूदा कार्यालय में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी है. साथ ही विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और अन्य महत्वपूर्ण मेहमानों के स्वागत के लिए पर्याप्त रिसेप्शन क्षेत्र भी उपलब्ध नहीं है. सरकार का तर्क है कि नए स्थान पर कार्यालय की जरूरतों के अनुरूप बेहतर व्यवस्था की जा सकती है.

आधव अर्जुन ने टेंडर को लेकर उठे सवालों पर यह भी कहा कि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी. उनका दावा था कि इसी वजह से टेंडर को लेकर सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए. उन्होंने यह तर्क भी दिया कि यदि शेड्यूल ऑफ रेट्स पहले ही सार्वजनिक कर दिए जाएं तो ठेकेदार अपनी कीमतें बढ़ा सकते हैं. सरकार की ओर से इस मामले में विस्तृत जानकारी वाली श्वेतपत्र रिपोर्ट जारी करने की बात भी कही गई है.

मुख्यमंत्री कार्यालय को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव सचिवालय परिसर में स्थित दस मंजिला नामक्कल कविन्यार मालिगई से जुड़ा है. यह भवन पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के कार्यकाल में बनाया गया था. वर्तमान में फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर में मुख्यमंत्री कार्यालय और विधानसभा दोनों स्थित हैं. ऐसे में कार्यालय के स्थानांतरण का फैसला केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है.

इसके अगले ही दिन सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर विधानसभा में नया विवाद खड़ा हो गया. टीवीके और डीएमके सदस्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार से संबंधित फाइलों का उल्लेख किया. मुख्यमंत्री के बयान को सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि जिन फाइलों का उन्होंने उल्लेख किया, उनके बारे में विधानसभा में विस्तृत जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की गई.

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब विजय सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संदेश दिया है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार समाप्त करने को सरकार की प्राथमिकताओं में बताया था और प्रशासन को भ्रष्टाचार के खिलाफ मिशन मोड में काम करने की बात कही थी.

दूसरी ओर, विपक्षी डीएमके सरकार के फैसलों में पारदर्शिता और प्रक्रियागत स्पष्टता पर सवाल उठा रही है. मुख्यमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण से जुड़े टेंडर और सड़क निर्माण कार्यों के आरोपों ने विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका दिया है. सरकार इन आरोपों को राजनीतिक विवाद के रूप में देख रही है और अपने फैसलों के समर्थन में प्रशासनिक कारण सामने रख रही है.

विधानसभा में इस टकराव का एक अहम पहलू यह भी है कि मुख्यमंत्री विजय ने सीधे पिछली डीएमके सरकार के कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने का संकेत दिया है. यदि सरकार भविष्य में इन फाइलों को सार्वजनिक करती है तो इससे तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो सकता है. फिलहाल मुख्यमंत्री ने न तो फाइलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है और न ही उनमें दर्ज आरोपों का विस्तृत विवरण सदन में रखा है.

सरकार की ओर से प्रस्तावित श्वेतपत्र भी इस विवाद में महत्वपूर्ण हो सकता है. यदि इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण, टेंडर प्रक्रिया और सड़क निर्माण से जुड़े आरोपों पर दस्तावेजी जानकारी सामने आती है तो सरकार को अपने फैसलों का बचाव करने का आधार मिलेगा. वहीं विपक्ष इस रिपोर्ट की सामग्री और निष्कर्षों को लेकर सवाल उठा सकता है.

इस बीच विधानसभा में मुख्यमंत्री की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में सरकार और डीएमके के बीच भ्रष्टाचार और प्रशासनिक फैसलों को लेकर टकराव और बढ़ सकता है. मुख्यमंत्री ने जिस अंदाज में दो फाइलों का उल्लेख किया है, उससे अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर उन फाइलों में क्या है और उन्हें सार्वजनिक करने का समय सरकार कब तय करती है. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण से शुरू हुआ विवाद अब पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार तक पहुंच गया है और तमिलनाडु की राजनीति में इसकी गूंज आगे भी सुनाई दे सकती है.

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