Wednesday, August 5, 2026
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Indian Railways : कंटेनर ट्रेन परिचालन हुआ आसान, सिंगल लाइसेंस व्यवस्था से कारोबार सुगमता को मिलेगा बढ़ावा

Indian Railways : भारतीय रेल ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (सीटीओ) को बड़ी राहत देते हुए मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट (एमसीए) में अहम संशोधनों को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत अब ऑपरेटरों को अलग-अलग मार्ग श्रेणियों के लिए अलग अनुमति और शुल्क लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
इसके बजाय 25 करोड़ रुपये के एकमुश्त पंजीकरण शुल्क पर सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर कंटेनर ट्रेनों का परिचालन कर सकेंगे। भारतीय रेल का मानना है कि इस फैसले से कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा और देश में माल परिवहन व्यवस्था अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी। इन संशोधनों को जल्द ही राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लागू किया जाएगा।
सभी मार्गों के लिए एकल लाइसेंस

स्वीकृत संशोधनों के तहत लाइसेंस की वर्तमान मार्ग-वार श्रेणीकरण व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। रेल मंत्रालय की स्वीकृति के अधीन, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस प्रदान किया जाएगा, जिससे वे भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर कंटेनर ट्रेनों का परिचालन कर सकेंगे।

एकसमान पंजीकरण शुल्क

विभिन्न मार्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग पंजीकरण शुल्क लेने की मौजूदा व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।अब प्रत्येक आवेदक को भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर परिचालन के लिए 25 करोड़ रुपये का अप्रतिदेय एकसमान पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा।

लाइसेंस विस्तार पर कोई शुल्क नहीं

स्वीकृत संशोधनों के अनुसार, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर को दी गई अनुमति की अवधि समाप्त होने के बाद उसे आगे 20 वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकेगा। यह विस्तार सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऑपरेटर के आवेदन तथा उसके संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किया जाएगा। इस विस्तार अथवा भविष्य में उसी ऑपरेटर को दिए जाने वाले किसी भी अन्य विस्तार के लिए कोई विस्तार शुल्क नहीं लिया जाएगा।

मौजूदा ऑपरेटरों को राहत

भारतीय रेल ने मौजूदा कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए भी स्पष्ट संक्रमण व्यवस्था तय की है। कैटेगरी-I के लाइसेंसधारी अपनी मौजूदा कन्सेशन अवधि पूरी होने तक पूर्व व्यवस्था के तहत परिचालन जारी रख सकेंगे और नई लाइसेंस प्रणाली में नवीनीकरण या विस्तार के समय उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं कैटेगरी-II, III और IV के ऑपरेटर भी अपनी वर्तमान कन्सेशन अवधि पूरी होने तक मौजूदा श्रेणी में काम कर सकेंगे।

नई सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस व्यवस्था अपनाने के लिए उन्हें 15 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जो नए 25 करोड़ रुपये के पंजीकरण शुल्क और पहले जमा किए गए 10 करोड़ रुपये के बीच का अंतर है। यह राशि अप्रतिदेय होगी। इसके अलावा, ये ऑपरेटर अपनी 20 वर्ष की कन्सेशन अवधि पूरी होने से पहले भी नई लाइसेंस व्यवस्था में स्वेच्छा से शामिल हो सकते हैं, जिसके लिए भी उन्हें 15 करोड़ रुपये का ही भुगतान करना होगा।

उद्योग को लाभ

एकसमान पंजीकरण शुल्क तथा लाइसेंस विस्तार शुल्क समाप्त किए जाने से ऑपरेटरों के नियामकीय एवं अनुपालन संबंधी खर्चों में कमी आएगी तथा अनुमोदन प्रक्रिया सरल होगी।

सरल लाइसेंसिंग व्यवस्था से निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा तथा कंटेनर ट्रेन परिचालन का विस्तार होगा, जिससे देशभर में रेल आधारित माल परिवहन को प्रोत्साहन मिलेगा। कंटेनर परिवहन में रेल के अधिक उपयोग से उद्योग, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, क्योंकि उन्हें अधिक दक्ष और लागत-प्रभावी माल परिवहन का विकल्प उपलब्ध होगा।

कंटेनर यातायात का सड़क से रेल की ओर अधिक स्थानांतरण होने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़भाड़ कम होगी, ईंधन की खपत घटेगी तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे अधिक टिकाऊ माल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

एकसमान एवं सरल लाइसेंसिंग व्यवस्था की दिशा में

भारतीय रेल के अनुसार, इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए सरल, पारदर्शी और एकरूप लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू करना है। नई व्यवस्था से लाइसेंस और अनुमोदन की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, तेज और आसान होगी, जिससे ऑपरेटरों को अलग-अलग श्रेणियों और मार्गों के लिए अलग अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

साथ ही, मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट (एमसीए) के तहत पूरे भारतीय रेल नेटवर्क में कंटेनर ट्रेन परिचालन के लिए एक समान नियामकीय ढांचा लागू होगा, जिससे कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलने के साथ माल परिवहन व्यवस्था भी अधिक प्रभावी और प्रतिस्पर्धी बनेगी।

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