Sunday, March 15, 2026
Homeराष्ट्रीयखामेनेई की मौत के बाद भी क्यों नहीं बदला सत्ता का समीकरण?

खामेनेई की मौत के बाद भी क्यों नहीं बदला सत्ता का समीकरण?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेताओं की मौत की खबर सामने आई। इस कार्रवाई ने पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति को हिला दिया। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस हमले का असली मकसद क्या था — और क्यों अमेरिका को अब भी अपनी रणनीति अधूरी लग रही है?


हमले के पीछे असली उद्देश्य: सत्ता परिवर्तन

बताया जा रहा है कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य सिर्फ सैन्य जवाब देना नहीं था, बल्कि ईरान में “रिजीम चेंज” यानी सत्ता परिवर्तन कराना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति यह थी कि खामेनेई को हटाकर ईरान में एक ऐसी सरकार लाई जाए जो पश्चिमी देशों के साथ तालमेल बिठा सके।

खामेनेई लंबे समय से अमेरिका की नीतियों के मुखर आलोचक रहे थे। अमेरिका ने पहले कूटनीतिक दबाव और बातचीत की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया।


न्यूक्लियर कार्यक्रम भी बना बड़ी वजह

अमेरिका को यह आशंका थी कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भले ही ईरान ने आधिकारिक तौर पर कभी परमाणु हथियार बनाने की घोषणा नहीं की, लेकिन अमेरिका को उसके परमाणु कार्यक्रम पर गहरा संदेह था।

इसी वजह से अमेरिका ईरान पर लगातार दबाव बनाए हुए था। खामेनेई के रहते इस नीति में बदलाव की संभावना कम दिख रही थी।


ईरान का पलटवार और बढ़ता तनाव

हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। कुछ अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और एयरबेस को नुकसान पहुंचने की खबरें भी आईं।

शुरुआत में ट्रंप ने दावा किया था कि यह संघर्ष चार दिनों में समाप्त हो जाएगा, लेकिन अब यह अवधि बढ़कर कई हफ्तों तक खिंचती दिख रही है। इससे साफ है कि हालात अमेरिका की अपेक्षा के मुताबिक नहीं बढ़ रहे।


क्यों अधूरा रह गया अमेरिका का मकसद?

खामेनेई की मौत के बावजूद ईरान की सत्ता संरचना पूरी तरह नहीं टूटी है। देश में व्यापक स्तर पर सत्ता विरोधी प्रदर्शन नहीं हुए। कुछ जगहों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं जरूर दिखीं, लेकिन बड़े पैमाने पर सत्ता परिवर्तन की मांग सड़कों पर नहीं उतरी।

ईरान की मौजूदा व्यवस्था अब भी खामेनेई समर्थक नेतृत्व के नियंत्रण में है। यही वजह है कि अमेरिका का “रिजीम चेंज” वाला सपना फिलहाल अधूरा नजर आ रहा है।


आगे क्या?

मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच टकराव किस दिशा में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

एक बात तय है — खामेनेई की मौत के बाद भी ईरान में सत्ता परिवर्तन अपने आप नहीं हुआ। और यही वह अधूरी हसरत है, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना दिया है।

Related Articles

Latest News