Tuesday, September 15, 2026
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मोहन कैबिनेट के निर्णय: धान की मिलिंग के लिए और बिजली कंपनियों को राशि प्रदान करने की स्वीकृति

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार शाम को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में प्रदेश में उपार्जित धान की मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन और अपग्रेडेशन राशि की स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार मिलिंग राशि 10 रुपये प्रति क्विंटल और प्रोत्साहन राशि 50 रुपये प्रति क्विंटल प्रदाय की जायेगी।

साथ ही 20% परिदान एफसीआई को करने पर 40 रुपये और 40% परिदान एफसीआई को करने पर 120 रुपये प्रति क्विंटल अपग्रेडेशन राशि प्रदाय की जायेगी। इससे किसानों से उपार्जित धान की मिलिंग में तेजी आयेगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं अंतर्गत चावल की आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने के साथ राज्य की आवश्यकता के अतिरिक्त अतिशेष चावल की मात्रा को केंद्रीय पूल में त्वरित गति से परिदान किया जायेगा।

मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार द्वारा जारी रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत विद्युत वितरण कम्पनियों को राज्यांश 40% राशि लगभग 6 हजार करोड़ रूपये ऋण के स्थान पर अंशपूंजी/अनुदान के रूप में प्रदान करने की स्वीकृति दी गयी है। निर्णय अनुसार राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों को वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, वितरण हानियों में कमी तथा वितरण प्रणाली सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण/विकास कार्यों के लिए राज्यांश की राशि ऋण के स्थान पर राज्य शासन द्‌वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जायेगी।

मंत्रि-परिषद द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम उषा)’ के संचालन की सैद्धांतिक सहमति दी गयी है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, द्वारा वर्ष 2013 से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) चरण 1.0 एवं रूसा चरण 2.0 केंद्र प्रवर्तित योजना के रूप में लागू कर प्रारम्भ की गई थी। योजना में प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पी.एम. उषा योजना को 4 घटकों पर केन्द्रित किया गया है। जिसमें बहुसंकायी शिक्षा एवं शोध विश्र्वविद्यालय, विश्र्वविद्यालय के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान, महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान और लैंगिक समावेशिता एवं साम्यता पहल शामिल है।

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