Tuesday, September 15, 2026
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Vijaya Ekadashi: विजया एकादशी 2025 की तिथि, पूजा एवं पारण का शुभ मुहूर्त एवं कथा

सनातन संस्कृति में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी का अपना एक विशेष महत्व है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की शुरुआत हो चुकी है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी सोमवार 24 फरवरी के दिन पड़ रही है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्षमी की पूजा-अर्चना की जाती है।

विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। शत्रुओं में पर जीत हासिल होती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पावन तिथि पर किया जाने वाला यह व्रत जीवन में सफलता पाने और हर मनोकामना को पूरा करने के लिए विशेष रूप से किया जाता है। विजया एकादशी का व्रत मनुष्य के पापों को दूर करता है और उनके जीवन को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। शास्त्रों के अनुसार विजया एकादशी को व्रत रखने से व्‍यक्ति को पूर्वजन्म और इस जन्‍म के सभी पापों से मुक्ति मिलती है और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

विजया एकादशी तिथि

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार विजया एकादशी तिथि रविवार 23 फरवरी 2025 को दोपहर 1:55 बजे से आरंभ होकर सोमवार 24 फरवरी 2025 को दोपहर 1:44 बजे तक है। उदयातिथि के अनुसार सोमवार 24 फरवरी 2025 को विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त

विजया एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्षमी पूजन का शुभ मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5:11 बजे से प्रातः 6:01 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:12 बजे से 12:57 बजे तक तथा विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 बजे से अपरान्ह 3:15 बजे तक रहेगा।

पूजा विधि

एकादशी व्रत के दिन सुबह सूर्योदय के पूर्व स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब घर के पूजा स्थल पर या पास के किसी मंदिर में जाकर व्रत का संकल्प लें और भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान भगवान श्रीहरि विष्णु को पीले फल, पीले पुष्प, पंचामृत, तुलसी आदि समस्त पूजन सामग्री पूरे भक्ति भाव से अर्पित करें और भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का उच्चारण करें। एकादशी के दिन विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से विशेष लाभ होता है।

पारण

विजया एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त व्रत का पारण मंगलवार 25 फरवरी को सुबह 6:50 बजे से सुबह 9:08 बजे तक कर सकेंगे।

व्रत कथा

द्वापर युग में धर्मराज युद्धिष्ठिर को फाल्गुन एकादशी के महत्व के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने अपनी इस जिज्ञासा को भगवान श्रीकृष्ण के सामने प्रकट किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने फाल्गुन एकादशी के महत्व व कथा के बारे में बताते हुए कहा कि ये बात त्रेतायुग की है। जब भगवान श्रीराम ने माता सीता के हरण के पश्चात रावण से युद्ध करने के लिए सुग्रीव की सेना को साथ लेकर लंका की ओर प्रस्थान किया तो लंका से पहले विशाल समुद्र ने रास्ता रोक लिया। समुद्र में बहुत ही खतरनाक समुद्री जीव थे, जो वानर सेना को हानि पहुंचा सकते थे। चूंकि श्रीराम मानव रूप में थे, इसलिये वे इस गुत्थी को उसी रूप में सुलझाना चाहते थे। उन्होंने लक्ष्मण से समुद्र पार करने का उपाय जानना चाहा तो लक्ष्मण ने कहा कि हे प्रभु वैसे तो आप सर्वज्ञ हैं, फिर भी यदि आप जानना ही चाहते हैं तो मुझे लगता है कि यहां से आधा योजन की दूरी पर वकदालभ्य मुनिवर निवास करते हैं, उनके पास इसका कुछ न कुछ उपाय हमें मिल सकता है।

फिर क्या था, भगवान श्रीराम उनके पास पंहुच गए। उन्हें प्रणाम किया और अपनी समस्या उनके सामने रखी। तब मुनि ने उन्हें बताया कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को यदि आप समस्त सेना सहित उपवास रखें तो आप समुद्र पार करने में तो कामयाब हो जाएंगे। साथ ही इस उपवास के प्रताप से आप लंका पर भी विजय प्राप्त करेंगे। समय आने पर मुनि वकदालभ्य द्वारा बताई गई विधिनुसार भगवान श्रीराम सहित पूरी सेना ने एकादशी का उपवास रखा और रामसेतु बनाकर समुद्र को पार कर रावण को परास्त किया।

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