मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में एक्स्ट्रा हाईटेशन ट्रांसमिशन लाइन के दारे में अवैध निर्माण हो रहे हैं। इन लाइनों के नीचे परंतु बिजली की तुलना में 400 से 950 गुना अधिक है। वहीं इन अवैध निर्माणों से बिजली लाइनों में बार-बार ट्रिपिंग और दुर्घटनाएं भी हो रही है। प्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में ऐसे 2388 निर्माण चिन्हित किये गये है, जिन्हें बार-बार नोटिस जारी कर निर्माण हटाने के लिये कहा जा रहा है।
जबलपुर में नई कॉलोनियों सहित अनेक क्षेत्रों में सैकड़ों मकान एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनो के खतरनाक दायरे में बने हुए हैं। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी बीते तीन वर्षों में ऐसे अवैध निमाणों के खिलाफ नोटिस जारी कर रही है। ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा इन लाइनो के नीचे बसे इलाकों में सार्वजनिक मुनादी के माध्यम से लोगों को सतर्क करने की कोशिश भी की जाती है। ट्रांसको के अधिकारी और कर्मचारी व्यक्तिगत तौर पर भी स्थानीय लोगों को कई बार समझाइश दे चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है। अब प्रशासन की मदद से अवैध निर्माणों को हटाने की सख्त कार्यवाही की तैयारी की जा रही है। लाइनों के नीचे बसे मकान न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह जनजीवन को गंभीर खतरे में जल रहे हैं।
जबलपुर में 600 से अधिक नोटिस
एमपी ट्रांसको के कार्यपालन अभियंता अजय पाल सिंह चौहान ने बताया कि शहर के पोलीपाथर, न्यू शास्त्री नगर, अधारताल, जसूजा सिटी सहित कई क्षेत्रों में हाई टेंशन लाइनों के नीचे अवैध मकान एवं निर्माण कार्य किए गए हैं। एमपी ट्रांसको द्वारा विगत तीन वर्षों में ऐसे मामलों पर 648 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2022, 2023 और अक्टूबर 2024 में भी कई बार चेतावनी दी गई, परंतु निर्माण नहीं रुके। अब जिला प्रशासन के सहयोग से सख्त कार्रवाई की योजना बनाई गई है।
राजधानी के इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण
132 केवी भोपाल बैरागढ़ टैप से लालघाटी लाइन, 132 केवी भोपाल आईटी पार्क लाइन, 132 केवी भोपाल अमरावतखुर्द लाइनों के आस-पास करोंद, लालघाटी, रतनपुरा, देवकीनगर, गोविंदपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया आदि में इस तरह के खतरनाक अनाधिकृत निर्माण विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किये गये है। भोपाल में 848 नोटिस जारी किये गये है।
इंदौर में इन क्षेत्रों में निर्माण
इंदौर की कार्यपालन अभियंता श्रीमति नम्रता जैन ने बताया कि 220 केवी इंदौर-जेतपुरा लाइन, 132 केवी नार्थ झोन -चंबल लाइन, 132 केवी साउथ झोन-चंबल लाइन, 132 केवी झोन महालक्ष्मी नगर, 220 केवी साउथ झोन इंदौर- इंटर कनेक्टर लाइनो के आस-पास पहले से ही क्रियाशील ट्रांसमिशन लाइनों के समीप यह निर्माण किये गये है। जिनसे दुर्घटना की आंशका बनी रहती है। इंदौर में 892 नोटिस जारी किये जा चुके है।
950 गुना अधिक जान का खतरा
आम घरों में उपयोग होने वाली विद्युत आपूर्ति की तीव्रता मात्र 230 वोल्ट होती है। यह स्तर भी इतना अधिक होता है कि यदि कोई व्यक्ति गलती से इसके संपर्क में आ जाए तो गंभीर रूप से घायल हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है। एक्स हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइनें, जिनमें विद्युत तीव्रता 122 केवी (यानी 132,000 वोल्ट) एवं 220 केवी (यानी 2.20,000 वोल्ट) होती है, जो कि घरेलू बिजली की तुलना में 600 से 950 गुना अधिक रहती है। यह अंतर दर्शाता है कि अगर मात्र 200 चोट के संपर्क में आने से जान को खतरा हो सकता है, तो 112 या 220 केवी की ट्रांसमिशन लाइनों के पापा रहने या निर्माण करने से कितना बड़ा जोखिम हो सकता है।
हादसे दे रहे चेतावनी
जबलपुर में करमेता, जसूजा सिटी व अन्य इलाकों में ट्रांसमिशन लाइन के समीप निर्माण कार्यों के चलते हाल ही में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। कहीं मजदूर घायल हुए, तो कहीं वाहनों के ट्रांसमिशन लाइन से संपर्क में आने से विद्युत आपूर्ति में बाधा आयी। प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की वजह से दुर्घटनाएं भी हो चुकी है। 132 केवी बैरागढ़ लाइन के नीचे निर्माण कार्य कर रहे अनेक नागरिक एक्स्ट्रा हाईटेंशन की चपेत में आ गये थे। हाल ही में जबलपुर में एक हाइवा वाहन रेत खाली करते समय ट्रांसमिशन लाइन से टकरा गया, जिससे शहर के कई इलाकों की बिजली प्रभावित हुई। इंदौर में खजराना क्षेत्र में भी एक मजदूर घर में टीन शेड लगाते समय एक्स्ट्रा टेंशन लाइन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुका है।
मुनादी व जनजागरूकता के प्रयास
एमपी ट्रांसको द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी एवं व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों को बार-बार जागरूक किया गया, फिर भी अनाधिकृत निर्माण नहीं रुक पा रहें हैं। अब प्रशासनिक सहयोग से अभियान चलाकर ऐसे निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।
ट्रांसमिशन कंपनी का उद्देश्य
ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा और जनहानि रोकना प्राथमिकता है। कंपनी का प्रयास है कि भविष्य में इस तरह के नियम विरुद्ध घातक निर्माण न हों और नागरिकों की सुरक्षा के साथ शहर की विद्युत आपूर्ति अनवरत सुनिश्चित की जा सके।









