राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। कार्यक्रम का विषय था – ‘कृषि परिवर्तन के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास’।
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान की मदद से खेती में क्रांति आई है। अब फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन, मौसम की जानकारी और सूखा जैसे हालातों का अनुमान सटीक तरीके से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसरो द्वारा विकसित ‘जियो पोर्टल’ से किसानों को मौसम, मिट्टी की नमी और फसल की सेहत जैसी जरूरी जानकारियां मिल रही हैं। इससे किसान समय रहते सही निर्णय ले पा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि अब रियल टाइम में गेहूं की बुवाई और कटाई की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ISRO और NASA के ‘निसार मिशन’ के जरिए छोटी से बड़ी जोत तक फसल से जुड़ी जानकारी मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में फसल नुकसान का सही आकलन नहीं हो पाता था, लेकिन अब सैटेलाइट तकनीक से यह काम पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है, जिससे किसानों को सही मुआवजा मिलना संभव हो सका है।
शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे नकली खाद और कीटनाशकों की पहचान करने वाला उपकरण बनाएं, क्योंकि इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन की फसल कीटनाशक से जलकर बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि विज्ञान का मतलब सिर्फ अंतरिक्ष नहीं, बल्कि सभी कृषि विज्ञान विषयों में शोध जरूरी है। ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के दौरान करीब 500 नये शोध विषय सामने आए हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
कृषि मंत्री ने ‘एक राष्ट्र-एक टीम-एक लक्ष्य’ का मंत्र देते हुए कहा कि किसानों के जीवन में बदलाव लाने के लिए वैज्ञानिकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने गन्ना, कपास में वायरस के समाधान और दलहन-तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया। अंत में, मंत्री ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुंभाशु शुक्ला को उनकी सफल अंतरिक्ष यात्रा पर बधाई दी और कहा कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां आज पूरी दुनिया को चौंका रही हैं।
उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे आगे भी कृषि, पशुधन और बागवानी से जुड़े क्षेत्रों में नए शोध करें, ताकि किसानों को सीधे लाभ मिल सके।











