प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर 17 सितंबर से प्रारंभ हुये सेवा पखवाडा अभियान के अंतर्गत जबलपुर की ग्राम पंचायत सगडा झपनी में मियावाकी पद्धति से कुल 6 हजार 990 पौधो का रोपण कर ‘नमो उपवन’ विकसित किया जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा पथ पर परिक्रमावासियों के आश्रय स्थल के लिये चिन्हित भूमि में से करीब 26 हजार वर्गफुट पर नमो उपवन विकसित किया जा रहा है ।
क्या है मियावाकी पद्धति
मियावाकी पद्धति एक वैज्ञानिक पौधारोपण तकनीक है, जिसे जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी ने विकसित किया। इस पद्धति का उद्देश्य प्राकृतिक वनों की तरह घने, आत्मनिर्भर और जैव विविधता से परिपूर्ण जंगल तैयार करना है। इस पद्धति में भूमि की गहरी खुदाई कर उसमें जैविक खाद, गोबर खाद और कम्पोस्ट मिलाया जाता है। फिर 3 पौधे प्रति वर्ग मीटर की घनत्व से विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं। नियमित सिंचाई, मल्चिंग और रखरखाव के कारण 2-3 वर्षों में पौधे पूरी तरह विकसित होकर घना जंगल तैयार कर देते हैं।
माँ शब्द में आकार में पहाड़ी पर बनाया जा रहा नमो उपवन
ग्राम सगड़ा झपनी में नमो उपवन का निर्माण नर्मदा परिक्रमावासी के आश्रय के लिये चिन्हित आश्रय स्थल के पास पहाड़ी पर बनाया जा रहा है। कुल सात एकड़ के इस पूरे क्षेत्र में तार फेंसिंग कर दी गई है। इसमें से 26 हजार वर्ग फीट में मियाबाँकी तकनीक से कुल 6 हजार 990 पौधे रोपे किये जा रहे है।
इन पौधों में सीताफल, नीम, जामुन, आम, अर्जुन, गुलमोहर, इमली, कदम, गुलर, शीशम प्रजाति के 2 हजार 330 पौधे, कचनार, झारूल, करंजी, आवंला, मौलश्री, अमलतास, कनेर (पीला), टीकोमा, बाटलब्रश, बेल प्रजाति के 2 हजार 330 पौधे तथा चांदनी, चमेली, मधुकामनी, कनेर (लाल), मोगरा, मेंहदी, गंधराज, मधुमालती, कलिंद्रा, देसीरोज प्रजाति के भी 2 हजार 330 पौधे और कुल 6 हजार 990 पौधे मियाबाँकी पद्धति से रोपित किये जा रहे हैं।










