
ज्योतिष केसरी
नवरात्रि पर्व आद्या शक्ति माँ दुर्गा के प्रति आस्था और विश्वास प्रकट करने वाला पर्व है। हमारे सनातन धर्म इसका बहुत ही बड़ा महत्व है और पूरे भारतवर्ष में ये धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जाता है। शारदेय एवं चैत्र नवत्रात्रि, दोनों नवरात्रियों का भगवान श्रीराम से अटूट सम्बन्ध है। चैत्र नवरात्रि भगवान श्रीराम के जन्म से तो शारदेय नवरात्रि भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से सम्बंधित है।
नवरात्रि यूँ तो वर्ष में 4 बार आती है, लेकिन चैत्र और शारदेय नवरात्रि का सबसे अधिक महत्व है। शारदेय नवरात्र पितृपक्ष की अमावस्या के दूसरे दिन आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होता है। इस बार शारदेय नवरात्र सोमवार 22 सितंबर 2025 से प्रारम्भ होगी। इसमें महाष्टमी व्रत दिन मंगलवार 30 सितंबर को, महानवमी व्रत पूजन बुधवार 1 अक्टूबर तथा दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी गुरुवार 2 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।
कलश स्थापना का मुहूर्त
देवी पूजन में घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। यह कलश अशुभता समाप्त कर घर में शुभता लाता है। इस वर्ष आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि का प्रारम्भ 22 सितंबर से है। इसलिए घट स्थापना 22 सितंबर को प्रातः 6 बजकर 01 मिनट से लेकर प्रातः 8 बजकर 09 मिनट के बीच में की जाएगी। दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। यह अभिजीत मुहूर्त काल है। देखा जाय तो घट स्थापना का यह सर्वोत्तम मुहूर्त है।
देवी का आगमन और वाहन
देवी भागवत और भागवत पुराण में उल्लेख है कि महालया के दिन जब पितृगण अपने लोक वापस चले जाते हैं, तब माँ दुर्गा अपने परिवार और गणों के साथ धरती पर आती हैं। प्रत्येक वर्ष जिस दिन नवरात्रि शुरू होती है, उस दिन के अनुसार माता हर बार अलग-अलग वाहनों से आतीं हैं। माता के वाहन पूरे वर्ष के भविष्य की शुभता या अशुभता बताते हैं। इस वर्ष नवरात्रि का प्रारम्भ सोमवार से हो रहा है अतः इस वर्ष माता का वाहन हाथी है, जो अच्छी वर्षा, कृषि, दुग्ध और धन-धान्य का शुभ सूचक है।
देवी के प्रस्थान का वाहन
इस वर्ष देवी का प्रस्थान गुरुवार को हो रहा है, अतः इस वर्ष देवी की विदाई का वाहन पालकी है। यह भी अत्यंत शुभ संकेत है। देश में सुख, शांति और समृद्धि की वृद्धि होगी।
इस वर्ष शारदेय नवरात्रि की विशेषता
इस साल की नवरात्रि की खास बात यह है कि इस वर्ष नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 10 दिनों की होगी। क्योंकि इस साल श्राद्ध पक्ष में एक तिथि का क्षय हो रहा है, अतः नवरात्रि में एक तिथि की वृद्धि हो गई। ऐसा इसलिए हो रहा क्योंकि इस बार शारदेय नवरात्रि में चतुर्थी तिथि की वृद्धि हो रही है। नवरात्रि में तिथि वृद्धि अति शुभफलदायक मानी जाती है। इस कारण से इस साल नवरात्रि के प्रभाव में शुभफल की प्राप्ति होगी।











