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कुदरत का कहर: बारिश से भीगा किसानों का धान, मेहनत और मुनाफा दोनों पर संकट

औरैया (हि. स.)। जिले में अचानक बिगड़े मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। मंडी समिति परिसर में खुले आसमान के नीचे रखा लाखों रुपये मूल्य का धान बेमौसम बारिश की चपेट में आकर भीग गया। जालौन जिले से दो दिन पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर धान बेचने आए किसानों की पूरी खेप बारिश में भीग गई, जिससे उनकी सालभर की मेहनत पर कुदरत की मार पड़ गई।

किसानों का कहना है कि मंडी समिति में छत या त्रिपाल की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई थी। जालौन के ग्राम भरसेन निवासी किसान रामपाल सिंह ने बताया कि वह धान लेकर मंडी पहुंचे थे, लेकिन बिक्री प्रक्रिया में देरी के चलते माल खुले में पड़ा रह गया। सोमवार को हुई तेज बारिश ने सारा धान खराब कर दिया। अब किसानों को न सिर्फ फसल की बर्बादी झेलनी पड़ रही है, बल्कि धान वापस घर ले जाने पर डबल भाड़ा भी देना पड़ेगा।

मंडी में काम कर रहे मजदूर आकाश ने बताया कि बारिश से धान की बोरियां पूरी तरह भीग गई हैं और अब उनमें सड़न शुरू हो गई है। मजदूर दिन-रात त्रिपाल बिछाकर और पानी निकालकर नुकसान कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन धान का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो चुका है।

मंडी समिति परिसर की हालत भी बेहद खराब है — जगह-जगह कीचड़ और जलभराव से किसान व मजदूरों को भारी परेशानी हो रही है। तस्वीरों में भी स्पष्ट है कि धान के ढेर पानी में डूबे हुए हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मंडी परिसर में तुरंत जलनिकासी और त्रिपाल की व्यवस्था की जाए, ताकि आगे नुकसान से बचा जा सके।

अन्नदाता की यह दुर्दशा प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर रही है। किसान कह रहे हैं — “मेहनत की कमाई पर बारिश नहीं, सिस्टम ने पानी फेरा है।”

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