(हि. स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कम्प्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन फेज-II के तहत किए जा रहे सुधारों की गुरुवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का लक्ष्य नागरिकों और उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं, अनुमतियों और निरीक्षणों से राहत देकर भरोसे पर आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध प्रशासन उपलब्ध कराना है।
उन्होंने निर्देश दिए कि हर सुधार का प्रभाव जमीन पर दिखना चाहिए और आम व्यक्ति को यह अनुभव होना चाहिए कि व्यवस्था उसके लिए आसान हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कम्प्लायंस रिफॉर्म्स के पहले फेज में देश में एक मजबूत पहचान बनाई है और अब फेज-II के माध्यम से इन सुधारों को स्थायी और संस्थागत रूप दिया जाना है।
उन्होंने कहा कि यह फेज केवल नियमों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली और सोच में परिवर्तन का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डी-रेगुलेशन का अर्थ नियंत्रण समाप्त करना नहीं, बल्कि अनावश्यक नियंत्रण हटाकर जरूरी नियमों को सरल और पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने दोहराया कि सरकार का संकल्प उत्तर प्रदेश को ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, दोनों में देश का अग्रणी राज्य बनाना है।
बैठक में बताया गया कि कैबिनेट सचिवालय द्वारा जनवरी 2026 में जारी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को कम्प्लायंस रिडक्शन फेज-I में देश का बेस्ट स्टेट घोषित किया गया है।
फेज-II के अंतर्गत कुल नौ थीम, 23 प्रायोरिटी एरिया और पांच ऑप्शनल प्रायोरिटी एरिया चिन्हित किए गए हैं, जिन पर चरणबद्ध ढंग से सुधार लागू किए जा रहे हैं।
भूमि उपयोग से जुड़े सुधारों पर चर्चा करते हुए बैठक में बताया गया कि किसानों और भू-स्वामियों को अनावश्यक परेशानियों से बचाने के लिए चेंज इन लैंड यूज जैसी जटिल अनुमतियों को समाप्त करने या सरल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
नियोजित क्षेत्रों में मास्टर प्लान के अनुरूप भूमि उपयोग के मामलों में अलग से अनुमति की आवश्यकता समाप्त करने और अनियोजित क्षेत्रों में भी भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया को सरल करने पर विशेष फोकस किया गया है।
भवन निर्माण और कंस्ट्रक्शन सेक्टर के संबंध में बैठक में बताया गया कि नक्शा पास कराने, लेआउट अप्रूवल और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं को रिस्क-बेस्ड सिस्टम पर लाया जा रहा है। इसके तहत सेल्फ-सर्टिफिकेशन और डीम्ड अप्रूवल को बढ़ावा देकर आम नागरिकों और बिल्डर्स को अनावश्यक देरी से राहत देने की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने-अपने सुधारों को तय समयसीमा में लागू करें और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ये सुधार केवल उद्योगों और निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिक के दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए भी हैं,चाहे वह घर बनाना हो, बिजली-पानी कनेक्शन लेना हो या किसी छोटी सेवा से जुड़ी अनुमति।











