उज्जैन: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा और वहां के प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर चल रही बहस अब मध्य प्रदेश के उज्जैन तक पहुंच गई है। महाकाल नगरी में भी इस मुद्दे को लेकर आवाज़ें उठने लगी हैं और महाकाल मंदिर सहित शहर के बड़े धार्मिक स्थलों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग तेज होती जा रही है।
गंगोत्री धाम के फैसले का असर
बारह ज्योतिर्लिंगों में भी प्रतिबंध की उठी मांग
उत्तराखंड के गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की खबर सामने आने के बाद अब देशभर के बारह ज्योतिर्लिंगों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस मांग की शुरुआत विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन से होती नजर आ रही है।
महाकाल मंदिर के पुजारी का बयान
आस्था हो तो प्रवेश, गलत मंशा पर रोक जरूरी
महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने इस मुद्दे पर कहा कि यदि कोई व्यक्ति सनातन धर्म में आस्था रखता है, तो उसे मंदिर में दर्शन करने का अधिकार होना चाहिए। लेकिन यदि कोई व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या गलत उद्देश्य से मंदिर परिसर में प्रवेश करता है, तो उस पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
हिंदू संगठनों ने तेज की मांग
काल भैरव, मंगलनाथ और सांदीपनि आश्रम भी शामिल
इस मुद्दे को हिंदू जागरण मंच जैसे हिंदूवादी संगठनों ने और तेज कर दिया है। संगठन ने मांग की है कि महाकाल मंदिर के साथ-साथ काल भैरव, मंगलनाथ मंदिर और सांदीपनि आश्रम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
उज्जैन में बढ़ता धार्मिक विमर्श
प्रशासन और ट्रस्ट की भूमिका पर टिकी नजर
फिलहाल इस मांग को लेकर उज्जैन में धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ट्रस्ट पर टिकी हैं कि इस मांग पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या कोई आधिकारिक निर्णय सामने आता है।











