मध्य भारत और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला इंदौर–हैदराबाद सेमी एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और आने वाले कुछ महीनों में इसे पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा।
एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही इंदौर से हैदराबाद का 18–20 घंटे का सफर घटकर केवल 10 घंटे रह जाएगा। साथ ही, दूरी में भी लगभग 150 किलोमीटर की कमी आएगी।
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहा है एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे भारत सरकार के भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) कर रहा है। इसे आधिकारिक तौर पर इंदौर–हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर भी कहा जाता है।
यह प्रोजेक्ट ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड—दोनों तरह के सेक्शन को मिलाकर तैयार किया जा रहा है। कुछ हिस्से पूरी तरह बन चुके हैं, जबकि बाकी अंतिम दौर में हैं।
भेरू घाट सेक्शन बना तकनीकी चुनौती
एक्सप्रेसवे का भेरू घाट सेक्शन खासा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। यहां टनल और वायडक्ट का निर्माण तेज़ी से किया जा रहा है। इंजीनियरिंग के लिहाज से यह हिस्सा इस पूरे प्रोजेक्ट को खास बनाता है।
हालांकि इसे 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कुछ तकनीकी और निर्माण संबंधी देरी के कारण अब इसे 2026 में पूरी तरह चालू किया जाएगा।
इंदौर से हैदराबाद की दूरी होगी काफी कम
फिलहाल इंदौर से हैदराबाद की यात्रा में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें 18 से 20 घंटे लगते हैं।
एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद:
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दूरी घटकर करीब 715 किलोमीटर रह जाएगी
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यात्रा समय में 8 से 10 घंटे की बचत होगी
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ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन लागत में भी बड़ी कमी आएगी
तीन राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा
यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना से होकर गुजरेगा।
मध्य प्रदेश
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इंदौर (तेजाजी नगर)
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बड़वाह
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खंडवा
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बुरहानपुर
महाराष्ट्र
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जलगांव
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हिंगोली
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अकोला
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वाशिम
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नांदेड़
तेलंगाना
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मंगलूर
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रामसनपल्ली
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रंगारेड्डी
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हैदराबाद
सेमी एक्सेस कंट्रोल रोड होने से बढ़ेगी सुरक्षा
यह एक सेमी एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, यानी इसमें हर जगह से एंट्री नहीं मिलेगी। इससे:
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सड़क हादसों का खतरा कम होगा
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वाहनों को लगातार तेज़ गति बनाए रखने में मदद मिलेगी
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लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रैवल ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक होगा
क्यों कहलाता है इंदौर–हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर?
इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य केवल यात्रा आसान बनाना नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देना भी है।
इसके शुरू होने के बाद:
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छोटे उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे
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इंडस्ट्रियल सेक्टर्स को तेज़ और सस्ता ट्रांसपोर्ट मिलेगा
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मध्य भारत और दक्षिण भारत के बीच आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी
इसी वजह से इसे इंदौर–हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर कहा जा रहा है।











