Thursday, April 23, 2026
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संजीवनी क्लीनिक घोटाला, न डाक्टर को कुर्सी मिली, न मरीज को दवाईयां

जबलपुर। एमपी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक में जबलपुर में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस योजना का उद्देश्य गरीबों को घर के पास मुफ्त इलाज और दवाएं देना था। उसे अफसरों ने भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया। हालात ऐसे हुए हुए कि क्लीनिकों में न कंप्यूटर है, न बीपी मशीन और न ही पिछले 2 साल से पुताई हुई। लेकिन रिकॉर्ड में करोड़ों का भुगतान हो चुका है।

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की टीम और डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यहां स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बिना सामान खरीदे ही करीब पौने दो करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। जांच शुरू होने के मात्र 3 दिन पहले आनन-फानन में कुछ सेंटरों पर प्रिंटर भिजवाए गए।

सवाल यह है कि जब क्लीनिक में कंप्यूटर ही नहीं है तो प्रिंटर का उपयोग क्या होगा। हैरानी की बात यह है कि जिन क्लीनिकों की मरम्मत और पुताई के नाम पर लाखों के बिल पास हुए, वहां पिछले दो साल से पेंट की एक बूंद तक नहीं आई है। डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 93 लाख का सामान तो ऐसा है जो न स्टोर में है और न ही किसी केंद्र पर।

भंडार शाखा के रजिस्टर में फर्जी एंट्रियां की गई हैं। कई क्लीनिकों में अलमारियां तक गायब हैं, जबकि उनका भुगतान हो चुका है। शुरुआती जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। इसमें न केवल स्थानीय बल्कि भोपाल तक के कुछ बड़े अधिकारियों की संलिप्तता संदिग्ध लग रही है। रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और कार्रवाई हो सकती है।

डाक्टर बोली, 2 साल से पर्सनल टैब पर कर रही हूं काम- गोरैया घाट क्लीनिक में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ सौम्या अग्रवाल ने बताया कि वे 2 साल से अपनी ड्यूटी कर रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें कंप्यूटर नहीं मिला। वे अपने पर्सनल टैब से मरीजों की एंट्री करती हैं। बीपी मशीन और अन्य जरूरी सामान की मांग 4-5 महीनों से की जा रही थी, जो जांच शुरू होने के बाद अब भेजा जा रहा है।

50 क्लीनिकों में जरुरी सुविधाएं तक नहीं-

जबलपुर में करीब 50 संजीवनी क्लीनिक संचालित हैं, लेकिन अधिकतर केंद्रों पर आज भी बुनियादी उपकरण नहीं हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन उपकरणों के नाम पर भुगतान हुआ वे न तो स्टोर में मिले और न ही क्लीनिक तक पहुंचे।

10 करोड़ तक पहुंच सकता है आंकड़ा-

डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी के अनुसार अब तक 93 लाख रुपये की सामग्री का गायब होना प्रमाणित हो चुका है। डॉ संजय मिश्रा पिछले 10 साल से जबलपुर में अलग-अलग पदों पर जमे हुए थे। सूत्रों का कहना है कि यदि 2021 से अब तक की सभी फाइलों की बारीकी से जांच हुईए तो यह घोटाला 10 करोड़ रुपए से अधिक का निकलेगा। इतना ही नहीं डॉण् मिश्रा की निजी पैथोलॉजी लैब में हिस्सेदारी और आय से अधिक संपत्ति के मामले भी अब जांच के दायरे में हैं।

मास्टरमाइंड पर गिरी गाज, जेडी-सीएमएचओ निलंबित

इस घोटाले का मुख्य आरोपी ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ व सीएमएचओ डॉ संजय मिश्रा को माना जा रहा है। शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही अब तक जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के अधिकारियों को हटाया गया है। एक फार्मासिस्ट को निलंबित और संविदा फार्मासिस्ट के खिलाफ कार्रवाई की गई हे।

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