RDVV : नारी सशक्तिकरण आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता है। समाज की प्रगति और देश के विकास का आधार तभी मजबूत होता है, जब महिलाओं को समान अधिकार, अवसर और सम्मान मिले। नारी शक्ति इंद्रधनुष के सात रंगों के समान है। नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, कला, राजनीति और व्यवसाय में अपनी प्रतिभा से नई राहें बनाती है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश में सशक्त महिला नेतृत्व को सामने लाने सकारात्मक प्रयास है। ये बातें प्रभारी कुलगुरु प्रो. राकेश बाजपेयी ने सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पर मंथन‘ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कही।
RDVV : रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पर मंथन‘ की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए विधि विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या चंसोरिया ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संवैधानिक संशोधन) भारत में लोकसभा, दिल्ली विधानसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिषत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का एक ऐतिहासिक कानून है। सितंबर 2023 में पारित यह कानून (जिसे पहले 128वां संशोधन विधेयक कहा गया था) महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण और संसद में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए लाया गया है।

RDVV : प्रारंभ में विवि प्रभारी कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि महिलाओं को जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा कल्याणकारी कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, ताकि वे सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को पार कर सकें और सर्वांगीण सशक्तिकरण प्राप्त कर सकें। इनमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी सुश्री मधु यादव ने कहा कि आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है।
RDVV : वो चाहे हमारे देश की रक्षा की बात हो या किसी खेल प्रतिस्पर्धा में स्वयं को साबित करना हो। महिलाएं हमेशा से आगे रह रही है। महिलाओं से अनुरोध है कि वे अपनी बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाएं। विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. ऋचा धीरावाणी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम मंथन में बात आगे की होनी चाहिए यानी 50-50 हमारा ध्येय है। एक महिला परिवार में सभी चीजों के लिये बेहद जिम्मेदार मानी जाती है अतः वो सभी समस्याओं का समाधान अच्छी तरह से कर सकती है। महिलाओं के सशक्त होने से पूरा समाज अपने आप सशक्त हो जायेगा।
A revolutionary step-
RDVV : विशिष्ट अतिथि एवं विधि विशेषज्ञ डॉ. अंकिता बिसेन ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की मुख्य विशेषताओं पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि इस अधिनियम के अनुसार प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाने वाली लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं की सीटों में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए होंगी।
RDVV : यह कानून परिसीमन (क्मसपउपजंजपवद) प्रक्रिया के बाद ही लागू होगा, जो 2026 के बाद की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित हो सकता है। यह आरक्षण कानून 15 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे बाद में बढ़ाया भी जा सकता है। यह 20 सितंबर 2023 को लोकसभा और 21 सितंबर 2023 को राज्यसभा में भारी बहुमत से पारित हुआ था।
RDVV : विशिष्ट अतिथि एवं हाईकोर्ट लीगल एड. दिव्यकीर्ति बोहरे ने कहा कि यह कानून नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएगा, जिससे समाज में अधिक समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह दशकों से लंबित महिला आरक्षण की मांग को पूरा करता है और यह महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
RDVV : Women also play an important role in nation building.
विशिष्ट अतिथि एवं योगाचार्य कल्पना सिंह ने कहा कि नारी -शक्ति वंदन अधिनियम नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, लोकसभा और राज्य सभा में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने के बाद महिलाओं को भी देश के निर्माण अहम भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। विशिष्ट अतिथि एवं शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. अलका नायक ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत की लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम है।











