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MP High court का कड़ा रुख, नकली दूध कांड के आरोपी को नहीं मिली राहत

MP High court  : नकली दूध, पनीर, घी और अन्य डेयरी उत्पादों के कथित अवैध कारोबार से जुड़े बहुचर्चित मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए आरोपित किशन मोदी को जमानत देने से इन्कार कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट कहा कि मनी लान्ड्रिंग कोई सामान्य आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह देश की वित्तीय व्यवस्था और संप्रभुता पर सीधा हमला है. न्यायालय की इस टिप्पणी को मामले की गंभीरता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की समर वेकेशन बेंच में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन किया. न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपित की भूमिका गंभीर प्रतीत होती है और उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है. ऐसे में उसे जमानत का लाभ प्रदान करना उचित नहीं होगा. अदालत ने इसी आधार पर जमानत याचिका खारिज कर दी.

मामले के अनुसार किशन मोदी भोपाल स्थित मेसर्स जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं. यह कंपनी ‘मिल्क मैजिक’ ब्रांड नाम से विभिन्न डेयरी उत्पादों का निर्माण और विपणन करती है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में कंपनी के संचालन को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी में दूध से प्राकृतिक फैट निकालने के बाद उसकी जगह पाम ऑयल तथा अन्य पदार्थों का उपयोग किया जाता था, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता प्रभावित होती थी.

ईडी के अनुसार इस कथित मिलावटी कारोबार के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी उत्पादों की बिक्री की गई. जांच में सामने आया है कि इस कारोबार से लगभग 20 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित की गई. इसके अतिरिक्त 15 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और मनी लान्ड्रिंग से जुड़े तथ्यों का भी खुलासा हुआ है. जांच एजेंसी का कहना है कि अवैध कमाई को वैध दर्शाने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया गया, जिसकी पड़ताल अभी भी जारी है.

सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड सामने आए हैं, जो आरोपित की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं. अदालत ने भी माना कि ऐसे मामलों में आर्थिक अपराधों की प्रकृति और उनके व्यापक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. न्यायालय ने कहा कि मनी लान्ड्रिंग जैसी गतिविधियां केवल आर्थिक अनियमितता नहीं हैं, बल्कि वे वित्तीय तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं.

हाई कोर्ट के इस फैसले को आर्थिक अपराधों और खाद्य मिलावट से जुड़े मामलों में सख्त न्यायिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, प्रवर्तन निदेशालय की जांच आगे भी जारी रहेगी और आने वाले समय में मामले में अन्य महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

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