National Award : राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद अभिनेता, निर्देशक और निर्माता धनुष को लेकर छिड़े विवाद पर आखिरकार उनकी चुप्पी टूट गई. ‘रायन’ को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने और ‘कैप्टन मिलर’ के लिए उन्हें स्पेशल मेंशन (श्रेष्ठ अभिनेता) सम्मान दिए जाने के बाद सोशल मीडिया और फिल्म जगत के एक वर्ग ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे.
अब एक सार्वजनिक कार्यक्रम में धनुष ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए स्वीकार किया कि वर्ष 2024 में उनकी फिल्म से बेहतर तमिल फिल्में भी थीं, लेकिन उन्होंने अपने काम में पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ मेहनत की थी. साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि एक तमिल कलाकार को एक ही वर्ष में दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की खुशी मनाई जानी चाहिए.
कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए धनुष ने कहा कि वह उन दर्शकों और प्रशंसकों की भावनाओं का सम्मान करते हैं, जिन्हें लगता है कि उस वर्ष कुछ अन्य तमिल फिल्में पुरस्कार की अधिक हकदार थीं. उन्होंने कहा कि वास्तव में 2024 में कई बेहतरीन फिल्में आईं और उनके प्रशंसकों का अपनी पसंदीदा फिल्मों के लिए आवाज उठाना स्वाभाविक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी की भावनाओं का अनादर नहीं करना चाहते और आलोचना को भी सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं.
धनुष ने अपने लंबे फिल्मी सफर का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे कई अवसर आए जब लोगों को पूरा विश्वास था कि उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने ‘अधु ओरु कना कालम’, ‘पुधुपेट्टई’, ‘3’, ‘मयक्कम एन्ना’, ‘वड़ा चेन्नई’, ‘कर्णन’, ‘मरियन’ और हिंदी फिल्म ‘रांझणा’ जैसी फिल्मों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि हर बार दर्शकों ने उनसे कहा कि इस बार पुरस्कार निश्चित है, लेकिन वह सम्मान उन्हें नहीं मिला. इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया.
अभिनेता ने कहा कि जीवन में कुछ उपलब्धियां अपने समय पर स्वतः मिलती हैं. उनके अनुसार, ‘रायन’ को लेकर चाहे किसी की भी राय रही हो, लेकिन फिल्म बनाने में उन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया. उन्होंने कहा कि एक तमिल कलाकार के रूप में एक ही वर्ष में दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना पूरे तमिल समुदाय के लिए गर्व की बात है और इसे विवाद का विषय बनाने के बजाय उत्सव के रूप में देखा जाना चाहिए.
अपने संबोधन के दौरान धनुष ने अभिनेता अजीत कुमार के एक लोकप्रिय संवाद का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति स्वयं हार स्वीकार नहीं करता, तब तक कोई उसे हरा नहीं सकता. इस संदेश के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि आलोचनाओं के बावजूद उनका आत्मविश्वास कायम है और वह आगे भी पूरी निष्ठा से काम करते रहेंगे.
राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा के बाद कई फिल्म प्रेमियों ने सोशल मीडिया पर राय व्यक्त की थी कि कार्थी और अरविंद स्वामी अभिनीत ‘मेयाझगन’ तथा विजय सेतुपति और अनुराग कश्यप की ‘महाराजा’ जैसी फिल्मों को ‘रायन’ की तुलना में अधिक मजबूत दावेदार माना जा रहा था.
वहीं कुछ लोगों का यह भी मानना था कि ‘कैप्टन मिलर’ के लिए स्पेशल मेंशन सम्मान किसी अन्य अभिनेता को मिलना चाहिए था. इन तमाम बहसों के बीच धनुष का यह बयान अब चर्चा का नया केंद्र बन गया है, जिसमें उन्होंने एक ओर आलोचना को स्वीकार किया तो दूसरी ओर अपने सम्मान और तमिल सिनेमा की उपलब्धि का सम्मान करने की अपील भी की.








