Monday, August 31, 2026
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T20 विश्व कप विजेता सूर्यकुमार यादव टीम से बाहर, फैसले ने किया हैरान

भारतीय टी20 टीम की कप्तानी में लगातार सफलता हासिल करने के बावजूद सूर्यकुमार यादव को टीम से बाहर किए जाने का फैसला उनके लिए बेहद अप्रत्याशित था। टी20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम से बाहर किए गए सूर्यकुमार ने अब इस फैसले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि करीब 40-50 दिनों तक घर पर रहने के दौरान उनके मन में लगातार यह सवाल चलता रहा कि क्या उन्हें अब क्रिकेट खेलना चाहिए या नहीं। इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने में उनकी पत्नी की सलाह ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने सूर्यकुमार को उस जुनून को फिर से तलाशने की राह दिखाई, जिसकी वजह से उन्होंने करीब दो दशक पहले क्रिकेट को अपने जीवन का हिस्सा बनाया था।

पूर्व भारतीय कप्तान ने एक बातचीत में कहा कि जब उन्हें टीम में नहीं चुने जाने की जानकारी मिली तो वह पूरी तरह हैरान थे. उनके लिए यह फैसला इसलिए भी अप्रत्याशित था क्योंकि कप्तान के तौर पर पिछले दो वर्षों में भारतीय टीम ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया था. उनकी कप्तानी में टीम ने कोई श्रृंखला नहीं गंवाई और एशिया कप के साथ टी20 विश्व कप भी अपने नाम किया. ऐसे प्रदर्शन के बाद सूर्यकुमार को उम्मीद थी कि अगले बड़े लक्ष्य तक टीम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास रहेगी.

लेकिन चयनकर्ताओं के फैसले ने समीकरण बदल दिए. इंग्लैंड और आयरलैंड के दौरे के लिए चुनी गई टी20 टीम में सूर्यकुमार का नाम नहीं था और श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंपी गई. सूर्यकुमार ने स्वीकार किया कि उन्हें इस फैसले से निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने श्रेयस की नियुक्ति को लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई. उनका कहना था कि वह श्रेयस को लंबे समय से जानते हैं और उन्हें एक अच्छे खिलाड़ी के साथ-साथ अच्छा इंसान और कप्तान भी मानते हैं.

सूर्यकुमार की प्रतिक्रिया में सबसे दिलचस्प पहलू उनका वह दौर रहा, जब अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर होने के बाद उन्हें अपने भविष्य को लेकर सोचना पड़ा. उन्होंने बताया कि करीब 40-50 दिन तक घर पर रहने के दौरान उनके दिमाग में कई सवाल चल रहे थे. क्या उन्हें क्रिकेट जारी रखना चाहिए, आगे क्या करना चाहिए और उनकी भूमिका क्या होगी, ऐसे सवालों के बीच वह मानसिक रूप से उलझे रहे. इसी दौरान उनकी पत्नी ने उन्हें उस मूल कारण की याद दिलाई जिसके चलते उन्होंने क्रिकेट शुरू किया था.

उन्होंने बताया कि पत्नी ने उनसे पूछा कि करीब 20 साल पहले उन्होंने क्रिकेट खेलना क्यों शुरू किया था. जवाब था कि वह इस खेल के प्रति बेहद जुनूनी थे. इसी जुनून को दोबारा हासिल करने की सलाह ने सूर्यकुमार को अपना ध्यान वापस खेल पर केंद्रित करने में मदद की. उनके लिए यह अनुभव केवल टीम से बाहर होने की निराशा से निकलने का नहीं, बल्कि अपने खेल के प्रति पुराने जुनून को फिर से खोजने का भी रहा.

सूर्यकुमार ने यह भी बताया कि दबाव की परिस्थितियों में मुस्कुराना उनकी आदत रही है. जब उन्हें पता चला कि टीम में उनका नाम नहीं है, तब भी उन्होंने मुस्कुराकर इस स्थिति का सामना किया. उनका कहना है कि क्रिकेट करियर के दौरान जब भी परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं रहीं या दबाव बढ़ा, उन्होंने मुस्कुराने को अपना तरीका बनाया. यही रवैया इस बार भी उनके काम आया.

हालांकि कप्तानी के स्तर पर सूर्यकुमार का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा, लेकिन बल्लेबाज के तौर पर उनका हालिया प्रदर्शन चयनकर्ताओं की चिंताओं की वजह हो सकता है. टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके नाम 113 मैचों में 3,272 रन हैं. उनका औसत 36 से अधिक और स्ट्राइक रेट 162 से ज्यादा रहा है. उनके नाम चार शतक और 25 अर्धशतक दर्ज हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि वह भारत के सबसे प्रभावी टी20 बल्लेबाजों में रहे हैं.

इसके बावजूद टी20 विश्व कप 2024 के बाद उनकी बल्लेबाजी में पहले जैसी निरंतरता नहीं रही. इस अवधि में उन्होंने 42 पारियों में 932 रन बनाए और उनका औसत करीब 25.88 रहा. आईपीएल 2026 में भी मुंबई इंडियंस के लिए उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. 13 पारियों में उनके बल्ले से 270 रन निकले. ऐसे में कप्तानी में शानदार रिकॉर्ड के बावजूद बल्लेबाजी के प्रदर्शन को नजरअंदाज करना चयनकर्ताओं के लिए आसान नहीं था.

सूर्यकुमार ने माना कि उन्होंने टीम से बाहर किए जाने की कल्पना नहीं की थी. वह अगले दो वर्षों की योजना को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे थे. उनका लक्ष्य आगामी लॉस एंजिल्स ओलंपिक और 2028 टी20 विश्व कप तक टीम को आगे ले जाने का था. उनके अनुसार वह भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे थे, लेकिन चयनकर्ताओं की सोच अलग थी. उन्होंने कहा कि यदि टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं को भविष्य के लिए कोई दूसरा फैसला बेहतर लगा तो उन्होंने वही फैसला लिया और उन्होंने उस निर्णय पर प्रतिक्रिया देने के बजाय उसे स्वीकार किया.

कप्तानी बदलने के सवाल पर सूर्यकुमार की सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने इसे व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं बनाया. श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी. उनकी निराशा का कारण यह था कि जब टीम लगातार जीत रही थी, एशिया कप और विश्व कप जैसे बड़े खिताब हासिल कर चुकी थी और कोई श्रृंखला नहीं हारी थी, तब उन्हें लगा था कि उसी व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा.

इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय टी20 क्रिकेट में कप्तानी से ज्यादा चयन प्रक्रिया और प्रदर्शन के बीच संतुलन को चर्चा में ला दिया है. किसी खिलाड़ी का कप्तानी रिकॉर्ड शानदार हो सकता है, लेकिन अंतिम फैसला उसकी मौजूदा बल्लेबाजी, टीम की भविष्य की जरूरत और चयनकर्ताओं की रणनीति पर निर्भर करता है. सूर्यकुमार के मामले में भी यही अंतर दिखाई देता है. कप्तान के रूप में सफलता और बल्लेबाज के रूप में हालिया गिरावट दोनों को साथ रखकर फैसला लिया गया.

अब सूर्यकुमार का ध्यान वापसी की तैयारी पर है. 35 वर्षीय बल्लेबाज ने साफ किया है कि फिलहाल वह अपना पूरा ध्यान टी20 क्रिकेट पर लगाना चाहते हैं. उन्होंने एकदिवसीय क्रिकेट को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उन्होंने इस प्रारूप के साथ तालमेल बैठाने की काफी कोशिश की, लेकिन उन्हें इसमें वह सहजता महसूस नहीं हुई जो टी20 में है. इसलिए उनकी तैयारी का केंद्र टी20 ही रहेगा.

एकदिवसीय क्रिकेट में उनके आंकड़े भी टी20 के मुकाबले कमजोर रहे हैं. 37 मैचों की 35 पारियों में उन्होंने 773 रन बनाए हैं और उनका औसत करीब 25.76 रहा है. उनके नाम चार अर्धशतक हैं. इसके विपरीत टी20 में उनका स्ट्राइक रेट और प्रभाव उन्हें अलग पहचान देता है. इसलिए टीम में वापसी की उनकी रणनीति भी उसी प्रारूप पर केंद्रित दिखाई दे रही है जिसमें उन्होंने खुद को सबसे अधिक प्रभावी साबित किया है.

सूर्यकुमार के लिए टीम से बाहर होना निश्चित रूप से बड़ा झटका रहा, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया से यह संकेत भी मिलता है कि उन्होंने इसे अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत नहीं माना है. कप्तानी छिनने और टीम से बाहर होने के बाद वह अब अपने सबसे मजबूत पक्ष यानी टी20 क्रिकेट पर लौटना चाहते हैं. उनकी चुनौती केवल चयनकर्ताओं को जवाब देने की नहीं होगी, बल्कि अपने बल्ले से वह निरंतरता वापस हासिल करने की होगी जिसने उन्हें भारत के सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाजों में शामिल किया था.

इस कहानी का सबसे अहम पहलू यही है कि विश्व कप विजेता कप्तान होने के बावजूद सूर्यकुमार को टीम से बाहर बैठना पड़ा. उन्होंने इसे व्यक्तिगत संघर्ष में बदलने के बजाय अपने खेल के प्रति पुराने जुनून को फिर से जगाने का रास्ता चुना है. अब उनकी नजर मैदान पर वापसी और प्रदर्शन के जरिए अपनी जगह दोबारा हासिल करने पर होगी.

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