Wednesday, October 7, 2026
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पितरों को विदाई का दिन इस बार क्यों है स्पेशल? 10 अक्टूबर का राज जानिए

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है, लेकिन पितृ पक्ष की अंतिम अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या को सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में गिना जाता है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारण से नहीं हो पाया हो।

इस साल सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को पड़ रही है। यही वजह है कि इस बार अमावस्या का महत्व और बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार इस दिन पूरे दिन अमावस्या तिथि रहेगी और रात करीब 9:20 बजे तक इसका प्रभाव रहेगा।

10 अक्टूबर को अमावस्या के साथ शनिश्चरी संयोग

इस बार सर्वपितृ अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है, जिसके चलते इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में शनिवार और अमावस्या के संयोग को शनि उपासना तथा पितृ कर्मों के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है। जिन लोगों के परिवार में किसी पूर्वज की श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या को विशेष अवसर माना जाता है।

गजछाया योग को भी माना जा रहा खास

इस बार सर्वपितृ अमावस्या पर गजछाया योग बनने की बात भी ज्योतिषीय स्रोतों में कही गई है। लाइव हिन्दुस्तान के अनुसार 10 अक्टूबर को गजछाया योग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहने की बात कही गई है। ज्योतिषीय मान्यता में इस योग को पितृ कर्मों से जोड़कर देखा जाता है और माना जाता है कि इस दौरान श्रद्धा के साथ किया गया तर्पण और श्राद्ध विशेष फलदायी हो सकता है। हालांकि ऐसे धार्मिक और ज्योतिषीय फल मान्यताओं पर आधारित हैं, इनकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्यों खास मानी जाती है सर्वपितृ अमावस्या?

पितृ पक्ष के दौरान अलग-अलग तिथियों पर पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, लेकिन जिन लोगों को अपने पितरों की सही तिथि मालूम नहीं होती, वे सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर सकते हैं। इस दिन पितरों के निमित्त जल, तिल और कुश से तर्पण करने, पिंडदान करने तथा जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा से किए गए इन कर्मों के जरिए पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन भी माना जाता है और इसके बाद पितरों को विदाई दी जाती है।

शनि और पितृ पूजा का एक साथ अवसर

शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण इस दिन शनि देव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में शनि को कर्म और न्याय से जुड़ा ग्रह माना जाता है, जबकि बृहस्पति को धर्म और अध्यात्म से संबंधित माना जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरणों के अनुसार 10 अक्टूबर को शनि मीन राशि में और बृहस्पति कर्क राशि में स्थित होंगे। ऐसे में ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति को भी इस अमावस्या के विशेष संयोग से जोड़कर देखा जा रहा है।

पितरों के लिए करें तर्पण और दान

सर्वपितृ अमावस्या पर लोग अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों को भोजन कराना, अन्न-वस्त्र का दान करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा करना भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। उज्जैन जैसे धार्मिक शहरों में पितृ कर्म के लिए श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

इस दिन धार्मिक कर्मकांड करते समय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार शुभ समय की जानकारी लेना बेहतर माना जाता है। भोपाल के पंचांग के अनुसार 10 अक्टूबर को अमावस्या रात 9:20 बजे तक रहेगी।

इस बार क्यों बढ़ गई अमावस्या की चर्चा?

एक ही दिन सर्वपितृ अमावस्या और शनिवार का संयोग होने के साथ गजछाया योग का उल्लेख भी इसे ज्योतिष और धर्म के नजरिए से चर्चा में ला रहा है। पितृ पक्ष के अंतिम दिन होने के कारण यह तिथि वैसे भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद कर तर्पण और श्राद्ध करते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों का स्मरण कर श्रद्धा से किए गए कर्म परिवार में पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की परंपरा को मजबूत करते हैं। यही वजह है कि 10 अक्टूबर की सर्वपितृ अमावस्या को लेकर धार्मिक स्थलों और पितृ कर्म से जुड़े स्थानों पर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

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