Friday, April 24, 2026
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शिव नवरात्रि: शेषनाग रूप में सजे भगवान महाकाल

उज्जैन (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में चल रहे शिव नवरात्रि पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को भगवान महाकाल का शेषनाग श्रृंगार किया गया। भक्त भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर मुग्ध हो गए। शाम को बाबा महाकाल के आंगन में शिव विवाह के मौके पर हुई विद्युत रोशनी की जगमगाहट देख मन मयूर हो रहा है। झांझ, डमरू, ढोल, शहनाई आदि मंगलवाद्यों की मधुर ध्वनि ने कानों में मिश्री घोल दी।

महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि का उत्सव बड़ी धूम-धाम व उल्हास के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान श्री महाकालेश्वर भगवान का नौ दिवस तक अलग-अलग रूपों में श्रृंगार किया जा रहा है। देशभर से भक्त इस आनंदोत्सव में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं।

परंपरा अनुसार, शिव-नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह सर्वप्रथम कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर में पूजा हुई। पुजारी पं.घनश्याम शर्मा ने भगवान का पंचामृत अभिषेक कर पोडषोपचार पूजन किया। पश्चात भगवान कोटेश्वर व उमा महेश्वरी को हल्दी लगाई गई। नैवेद्य आरती व मंत्र पुष्पांजलि के बाद सुबह 9.30 बजे से गर्भगृह में भगवान महाकाल की पूजा शुरू हुई।

भगवान के पंचामृत अभिषेक के बाद पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राम्हणों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान जी का अभिषेक एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ से किया गया। पूजन का यह क्रम आठ मार्च 2024 तक प्रतिदिन चलेगा। दोपहर करीब एक बजे भगवान का हल्दी, चंदन से शृंगार कर भोग आरती की गई। दोपहर तीन बजे संध्या पूजन के बाद भगवान का शेषनाग रूप में श्रृंगार किया गया। भगवान महाकाल को गुलाबी रंग के नवीन वस्त्र के साथ मेखला, दुप्पटा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से सुसज्जित कर भांग, चंदन व सूखे मेवे से श्रृंगार किया गया। साथ ही भगवान महाकाल को मुकुट, मुंड माला, नागकुंडल एवं फलों की माला के साथ शेषनाग धारण करवाया गया। शिव नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को फाल्गुन कृष्ण सप्तमी पर भगवान का घटाटोप स्वरूप में श्रृंगार होगा।

प्रणव अदाणी ने किए बाबा महाकाल के दर्शन

वहीं, उज्जैन में शुक्रवार से शुरू हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में शामिल होने आए अदाणी इंटरप्राइजेस के निदेशक प्रणव विनोद अदाणी ने शाम को महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन कर पूजन-अर्चन किया। पूजन पंडित आकाश पुजारी ने संपन्न करवाया। इस दौरान मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक के निज सचिव प्रशांत त्रिपाठी, सत्कार सहायक चन्द्रप्रकाश शर्मा उपस्थित थे। उन्होंने अदाणी का सम्मान किया।

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