Friday, April 24, 2026
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किसानों की ओर से सरकार को सुझाव: कृषि बजट में हो बढ़ोतरी, बिजली विभाग में की जाए भर्ती

जबलपुर (लोकराग)। मध्यप्रदेश शासन द्वारा बजट पूर्व मांगे गये सुझावों के परिपेक्ष्य में प्रदेश के किसान भाइयों की ओर किसानों के गैर राजनैतिक, वर्ग विहीन राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज द्वारा 25 सूत्रीय सुझाव पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को प्रेषित किया गया है।

जिसमें मुख्य रूप से गांव, खेत और किसान के साथ मजदूर तथा ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए वर्तमान बजट मे प्रांत की 65 से 70 प्रतिशत आबादी के लिए प्रांत के कुल बजट में से केवल 9 से 11 प्रतिशत की राशि के आबंटन एवं प्रावधानों को पूर्ण रूप से अपर्याप्त बताते हुए, इसमें वृद्धि करने का सुझाव दिया गया। सुझाव पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बजट मे बढ़ोतरी के बिना किसान और गांव के विकास तथा समृद्धि की कल्पना बेमानी है।

गांव, खेत, किसान से जुड़े किसी भी विभाग की बात की जाये तो सभी जगह बजट राशि का रोना रोया जाता है। सिंचाई नहर वाले वरिष्ठ अधिकारी बोलते हैं कि नहर मरम्मत के लिए राशि नहीं है, भोपाल में सैकड़ों प्रस्ताव मंजूरी के लिए लंबित पड़े हैं।

बिजली के ट्रांसफार्मर, लाइनों की हालत बद से बदतर हो गई है, सुधार कार्य नहीं हो पाते, पैसे नहीं है। मैदानी कर्मचारियों की भारी कमी है, भर्ती के लिए बजट नहीं है। बिजली दूसरे राज्यों को बेची जा रही है, हमारे किसानों के लिए कहने को 10 घंटे बिजली आपूर्ति करने का प्रावधान है, पर उसे 5 घंटे भी बिजली नसीब नहीं हो पा रही।

किसानों की उपज उपार्जन के लिए प्रांत सरकार के पास पर्याप्त बजट नहीं है, किसान घाटे में अपनी उपज बेचने मजबूर है। खाद, बीज की व्यवस्था राशि के अभाव में लड़खड़ाई हुई है। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए तहसील स्तर पर बिल्डिंग बन कर, सालों से जर्ज़र हो चुकी हैं। आज तक स्टॉफ नियुक्ति के आभाव में चालू नहीं हो सकी।

एमपी की कृषि उपज मंडियां अन्य प्रांतो की तुलना में संसाधनों, तकनीक और सुविधाओं के लिहाज से बहुत पीछे है। ऐसा क्यों? क्या हम उनके समकक्ष नहीं आ सकते? सहकारी समितियों के उन्नयन के साथ प्रत्येक समिति स्तर पर भंडार ग्रह, कोल्ड स्टोरेज के निर्माण की आज महती आवश्यकता है।

ग्रामीण ग्रह उद्योग, प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना तथा मार्केटिंग सुविधा के लिए अलग से प्रयास किये जाने की महती आवश्यकता है। गांव के स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल, आंगनवाड़ी बदतर हालातों में है। धन राशि के अभाव में शिक्षकों, डाक्टरों, स्टाफ, दवाओं, संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।

सुझाव प्रस्ताव में ग्रामीण अधोसंरचना, नहरों के रखरखाव, मरम्मत, खेती के लिए बिजली की गुणवत्ता एवं उपलब्धता बढ़ाने, कृषि उपज उपार्जन, आदान समग्री खाद बीज दवाओं की मांग के अनुरूप पर्याप्त व्यवस्था हेतु बजट में वृद्धि के प्रावधान किये जाने एवं कृषि की समस्त आदान सामग्री, डीजल आदि कर मुक्त किये जाने तथा ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर अधिक बजट के साथ ही स्मार्ट सिटी की तर्ज पर स्मार्ट विलेज विकसित किये मांग की गई है।

भारत कृषक समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं महकौशल जोन के अध्यक्ष केके अग्रवाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को 25 सूत्रीय सुझाव प्रस्ताव प्रेषित करते हुए आग्रह किया है कि उनके नेतृत्व में इस वर्ष के बजट मे प्रांत के कुल बजट में गांव खेत किसान की कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाये, तभी ग्राम विकास एवं किसान समृद्धि की कल्पना साकार हो सकेगी।

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