जब तक गाँव और किसान समृद्ध नहीं होंगे देश समृद्ध नहीं होगा। वर्तमान में गांव, खेत, किसान के लिए मध्य प्रदेश सरकार के कुल बजट का 8 से 10 प्रतिशत का प्रावधान, 60 प्रतिशत आबादी के लिए अपर्याप्त है, इस बजट में उनकी समृद्धि की कल्पना बेमानी होगी।
आज के युवा खेती से दूर भाग रहे है। गाँव में संसाधनों के अभाव के कारण गांव से युवाओं का पलायन हो रहा है। जहां देखें वहाँ बजट का रोना रोया जाता है। सिंचाई विभाग वाले कहते हैं कि नहर की माकूल मरम्मत नहीं हो सकती, क्योंकि उनके पास धन का अभाव है। ठेकेदार काम करने तैयार नहीं होते क्योंकि कार्य के रेट के मापदंड कम हैं। पर्याप्त बजट ही नहीं है।
बिजली किसानों को पर्याप्त इसलिए नहीं मिलती। सुधार कार्य समय पर इसलिए नहीं होते क्योंकि राशि अपर्याप्त है, संसाधनों की कमी है। धन के अभाव में मांग के अनुरूप पर्याप्त खाद, बीज किसानों को सरकार नहीं दे पा रही है। किसानों की उपज भी पूरी नहीं खरीदी जाती, क्योंकि प्रावधान कम है।
मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के भवन हर तहसील में बनें हैं, मगर उनमें ताले पड़े हैं। भवन जर्ज़र हो चुके हैं, क्योंकि धन का आभाव है।
कृषि पम्प सौर ऊर्जा योजना बजट के अभाव में वर्षो से बंद पड़ी है। गाँव के अस्पतालों, स्कूलों की व्यवस्था चमराई हुई है। अस्पतालों में न डॉक्टर हैं, न दवाइयां। स्कूल, शिक्षक और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।
इस तरह जहाँ देखें सभी जगह धन का अभाव, बजट की कमी, इससे कैसे गाँव समृद्ध हो पाएंगे, समझ के परे है। किसानों के राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज के महाकौशल जोन के अध्यक्ष केके अग्रवाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेश सरकार गाँव, खेत, किसान के बजट में आबादी के अनुपात में बढ़ोतरी करे, तभी गाँव और किसान समृद्ध हो पाएंगे।
केके अग्रवाल ने सरकार से स्मार्ट सिटी की तर्ज पर स्मार्ट विलेज विकसित किये जाने तथा किसानों की खेती की लागत कम करने हेतु आदान वस्तुओं के दाम कम करने, टैक्स कम करने तथा सब्सिडी की राशि में बढ़ोतरी करने की मांग की है। उम्मीद है मध्य प्रदेश सरकार का इस वर्ष का बजट किसानों की उम्मीद पर खरा उतरेगा।









